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एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर अकादमिक संगोष्ठी आयोजित

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शिमला, 28 मार्च: एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का व्यावहारिक क्रियान्वयन: उच्च शिक्षा में चुनौतियाँ एवं अवसर” विषय पर एक दिवसीय अकादमिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सोलन तथा राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय चौड़ा मैदान के सहयोग से आयोजित हुई।

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संगोष्ठी का समन्वयन डॉ. मनींदर कौर द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। संगोष्ठी का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. (डॉ.) आर. एस. चौहान के उद्घाटन संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2025–26 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू कर दिया है। उन्होंने इस नीति को भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक परिवर्तनकारी पहल बताते हुए कहा कि यह बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास और लचीले पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्योगोन्मुख बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) आर. एल. शर्मा, डीन अकादमिक प्रो. (डॉ.) आनंद मोहन, डीन इंजीनियरिंग प्रो. (डॉ.) अंकित ठाकुर तथा प्रो-चांसलर प्रो. रमेश चौहान उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. राकेश शर्मा, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. मनीषा कोहली तथा डॉ. दीपक गुप्ता शामिल रहे।

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रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) आर. एल. शर्मा ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों जैसे पाठ्यक्रम पुनर्गठन, संकाय प्रशिक्षण एवं अवसंरचना विकास पर प्रकाश डाला। डीन अकादमिक प्रो. (डॉ.) आनंद मोहन ने नीति के उद्देश्यों और इसकी दूरदर्शी सोच पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया।

संगोष्ठी के अंतर्गत आयोजित पैनल चर्चा में डॉ. राकेश शर्मा, प्रो. (डॉ.) आर. एल. शर्मा, डॉ. मनीषा कोहली एवं प्रो. (डॉ.) आनंद मोहन ने भाग लिया। पैनल में संस्थागत तैयारियों, नवाचार की संभावनाओं एवं उच्च शिक्षण संस्थानों के समक्ष आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने संकाय विकास, अकादमिक लचीलापन, छात्र-केंद्रित शिक्षा एवं उद्योग-शिक्षा समन्वय को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया।

संगोष्ठी में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जिनमें राजकीय महाविद्यालय सोलन, राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय चौड़ा मैदान, राजकीय महाविद्यालय संजौली तथा एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के विद्यार्थी एवं शिक्षक शामिल थे। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के बीच विचारों एवं अनुभवों का सार्थक आदान-प्रदान हुआ।

कार्यक्रम का समापन वैलेडिक्टरी सत्र एवं प्रमाण-पत्र वितरण के साथ हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन के लिए संस्थागत समन्वय, रणनीतिक योजना एवं सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

Deepika Sharma

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