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आक्रोश: कोविड दौर पर बयानबाजी पर आपत्ति, डॉक्टरों के संघर्ष को याद करें: HMOA

HMOA का बयान

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कोविड-19 के दौरान हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य कर्मियों के अप्रतिम योगदान और बलिदान का स्मरण
हाल ही में सामने आए एक वीडियो में कोविड-19 महामारी के दौरान डॉक्टरों के व्यवहार को लेकर कुछ टिप्पणियां की गई हैं। जिसका HMOA विरोध दर्ज करता है

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एक चिकित्सक और हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (HMOA) के प्रतिनिधि के रूप में, हम उस भयावह दौर में लोगों के डर, असमंजस और पीड़ा को गहराई से समझते हैं। हालांकि, स्थिति के सही आकलन के लिए उस समय की पूर्ण वास्तविकताओं और हमारे स्वास्थ्य कर्मियों के संघर्ष को याद करना भी अत्यंत आवश्यक है।
• सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन, लापरवाही नहीं: महामारी के शुरुआती दौर में जब वायरस नया था और वैक्सीन उपलब्ध नहीं थी, तब ‘दूरी बनाए रखना’ या ‘कम से कम संपर्क में आना’ कोई व्यक्तिगत विकल्प या लापरवाही नहीं थी। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत एक अनिवार्य और सख्त मेडिकल प्रोटोकॉल था। इसका एकमात्र उद्देश्य संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ना और मरीजों के साथ-साथ सीमित संख्या में मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों को बचाना था।
• अथक परिश्रम और समर्पण: हिमाचल प्रदेश के डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मोर्चे पर डटकर काम किया। भारी और घुटन भरी पीपीई (PPE) किट पहनकर लगातार कई-कई घंटों तक मरीजों की देखभाल करना शारीरिक और मानसिक रूप से एक बेहद कठिन चुनौती थी, जिसे हमारे कोरोना योद्धाओं ने पूरी निष्ठा से निभाया।
• व्यक्तिगत और पारिवारिक बलिदान: दूसरों की जान बचाते हुए हमारे चिकित्सा जगत ने एक बहुत भारी कीमत चुकाई है। हमारे कई साथी खुद इस खतरनाक वायरस का शिकार हुए। सबसे पीड़ादायक यह है कि कर्तव्य का पालन करते हुए हिमाचल के कई डॉक्टरों ने अपने परिवार के सदस्यों और प्रियजनों को कोविड के कारण हमेशा के लिए खो दिया। अपने घरों में अपनों को खोने के गहरे दुख के बावजूद, हमारे डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी अपने आंसू पोंछकर अगले ही दिन वापस अस्पतालों में मरीजों की सेवा के लिए लौट आए।
उस अभूतपूर्व वैश्विक संकट के समय में, हिमाचल प्रदेश का चिकित्सा समुदाय जनता की रक्षा के लिए ढाल बनकर खड़ा रहा। हमारे स्वास्थ्य कर्मियों का यह अदम्य साहस, निस्वार्थ सेवा और सर्वोच्च पारिवारिक बलिदान आलोचना का नहीं, बल्कि हमारे समाज के गहरे सम्मान और कृतज्ञता का पात्र है।

Deepika Sharma

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