सनावर में STEM शिक्षा पर मंथन: जेपी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने दी आधुनिक शिक्षण की दिशा

जेपी यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के संकाय द्वारा द लॉरेंस स्कूल, सनावर में STEM फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप आयोजित सनावर, 12 फरवरी: द लॉरेंस स्कूल, सनावर में STEM शिक्षा पर एक फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 60 शिक्षकों ने भाग लिया। इस कार्यशाला का संचालन जेपी यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, वाकनाघाट के विशेषज्ञों द्वारा किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य अंतर्विषयक शिक्षण पद्धतियों को सुदृढ़ करना तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित (STEM) शिक्षा के आधुनिक विकास से शिक्षकों को परिचित कराना था। कार्यशाला के सत्र प्रतिष्ठित शिक्षाविदों — प्रो. तीर्थ राज सिंह, डॉ. रागिनी राज सिंह और डॉ. सौरभ श्रीवास्तव — द्वारा संचालित किए गए। प्रो. सिंह ने परियोजना आधारित एवं अनुभवात्मक शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नवाचार तथा समस्या समाधान क्षमता विकसित करने में STEM शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. रागिनी राज सिंह ने नैनोविज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय पर व्याख्यान दिया तथा स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स में इनके उपयोगों की जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि उभरती प्रौद्योगिकियाँ आधुनिक शिक्षा प्रणाली को किस प्रकार परिवर्तित कर रही हैं। डॉ. सौरभ श्रीवास्तव ने STEM क्षेत्रों में गणित की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता में रैखिक बीजगणित के उपयोग, जैसे इमेज प्रोसेसिंग और अमेज़ॉन जैसी कंपनियों द्वारा प्रयुक्त अनुशंसा प्रणालियों, की व्याख्या की। कार्यशाला के दौरान शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए नवीन शिक्षण रणनीतियों तथा उन्नत वैज्ञानिक एवं तकनीकी अवधारणाओं को कक्षा शिक्षण में सम्मिलित करने के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की। इस कार्यक्रम ने अंतर्विषयक शिक्षा, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों तथा STEM विषयों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यशाला के सफल आयोजन में विद्यालय प्रशासन और समन्वयकों — श्री हिम्मत एस. ढिल्लों (हेडमास्टर), श्री रवि कुमार (डिप्टी हेडमास्टर), सुश्री आशिमा बाथ (हेड TEC), श्री हितेन्दर जमवाल (हेड ऑफ फैकल्टी, कंप्यूटर साइंस) तथा श्री आर. पी. गौतम (गणित संकाय) — का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके प्रभावी समन्वय से कार्यक्रम का सुचारू संचालन सुनिश्चित हुआ। कार्यशाला का समापन शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास तथा विद्यार्थियों को भविष्य की वैज्ञानिक और तकनीकी चुनौतियों के लिए आवश्यक कौशल से सुसज्जित करने की आवश्यकता पर विशेष बल के साथ हुआ।


