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अलर्ट: चिट्टा से जुड़े मामलों में हिमाचल में 9 फीसदी वृद्धि

नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो” — हिमाचल पुलिस का राज्यव्यापी अभियान ‘चिट्टा’ और सिंथेटिक नशों के खिलाफ कड़ा मोर्चा

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हिमाचल प्रदेश पुलिस ने राज्यभर में बढ़ते “चिट्टा” (हेरोइन के रूप) और अन्य सिंथेटिक नशों के बढ़ते प्रचलन पर गहरी चिंता जताते हुए “नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो” राज्यव्यापी नशा मुक्ति अभियान की शुरुआत की है।
मुख्य उद्देश्य — युवाओं को नशे के विनाशकारी प्रभावों से बचाना और समाज को जागरूक बनाना।rt

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🚨 “चिट्टा” — युवाओं के भविष्य पर सबसे बड़ा खतरा

हिमाचल पुलिस ने बताया कि “चिट्टा” एक खतरनाक सिंथेटिक ड्रग है, जो सफेद या हल्के भूरे पाउडर के रूप में उपलब्ध होता है। इसे हेरोइन (डायसेटाइलमॉर्फिन) में रासायनिक पदार्थ मिलाकर तैयार किया जाता है।
यह नशा बेहद सस्ता, लत लगाने वाला और कॉलेज व स्कूल स्तर तक तेजी से फैल रहा है।


📉 भारत में नशे से मौतों में तेज़ वृद्धि

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्टों के अनुसार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में सिंथेटिक नशों से मौतों के मामलों में लगातार इज़ाफ़ा हुआ है।
विशेष रूप से पंजाब में “चिट्टा” के कारण सर्वाधिक मौतें दर्ज की गईं।
हिमाचल में भी पिछले वर्ष की तुलना में ऐसे मामलों में लगभग 9% की वृद्धि हुई है।


🇮🇳 राष्ट्रीय परिदृश्य

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के अनुसार पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्य हेरोइन और सिंथेटिक नशों से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
उत्तर भारत में “चिट्टा” की तस्करी का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।


🏔️ हिमाचल प्रदेश की स्थिति और पुलिस की सख्त कार्रवाई

वर्ष 2024–25 में NDPS अधिनियम के तहत 1,300 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें अधिकांश “चिट्टा” से संबंधित थे।
शिमला, कांगड़ा, ऊना, सोलन और मंडी जिले सबसे अधिक प्रभावित बताए गए हैं।
पुलिस अन्य विभागों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर नशा तस्करों की गिरफ्तारी, नेटवर्क ध्वस्त करने और जन-जागरूकता पर विशेष ध्यान दे रही है।

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⚠️ मुख्य कारण

  1. पड़ोसी राज्यों से नशे की तस्करी।

  2. बेरोज़गारी और साथियों का दबाव।

  3. कम दाम और आसान उपलब्धता।

  4. सोशल मीडिया पर बिक्री और प्रचार।


🚶‍♀️ राज्य स्तरीय वॉकथॉन — “Say No to Drugs, Yes to Life”

मुख्यमंत्री श्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देश पर पुलिस महानिदेशक श्री अशोक तिवारी, IPS ने राज्यव्यापी नशा मुक्ति अभियान का शुभारंभ घोषित किया है।

📅 15 नवम्बर 2025 (शनिवार)
🕚 प्रातः 11:00 बजे
📍 रिज, शिमला
🚩 मार्ग: रिज → विधानसभा → चौरा मैदान

कार्यक्रम में मंत्रिमंडल सदस्य, विधायक, अधिकारी, विद्यार्थी, NCC/NSS/NYK व एनजीओ शामिल होंगे। इसके बाद सभी जिलों में इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।


⚖️ NDPS अधिनियम, 1985 के अंतर्गत सख्त कानूनी कार्रवाई

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नरवीर सिंह राठौर ने बताया कि NDPS अधिनियम की धाराओं 21, 22, 27 और 29 के तहत चिट्टा रखना, बेचना या सेवन करना गंभीर अपराध है।

🔹 छोटी मात्रा (5 ग्राम तक) — 1 वर्ष कैद या ₹10,000 जुर्माना या दोनों
🔹 मध्यम मात्रा — 10 वर्ष कैद और ₹1 लाख जुर्माना
🔹 व्यावसायिक मात्रा (250 ग्राम या अधिक) — 10–20 वर्ष कैद और ₹1–2 लाख जुर्माना

जो लोग स्वयं इलाज के लिए आगे आते हैं, उन्हें धारा 64-A के तहत राहत मिल सकती है।
पुलिस ने अब तक सैकड़ों अपराधियों को सज़ा दिलाई और करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की है।


🗣️ पुलिस का संदेश

“कानून का सख्त पालन, जन-जागरूकता और पुनर्वास — यही नशामुक्त हिमाचल के तीन सशक्त स्तंभ हैं।”
— श्री नरवीर सिंह राठौर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक


💬 मुख्य संदेश

🎙️ “नशा छोड़ो – जीवन जोड़ो!”
🎙️ “Say No to Drugs – Yes to Life!”

हिमाचल प्रदेश पुलिस ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और नशामुक्त समाज के निर्माण में सहयोग करें।

Deepika Sharma

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