सम्पादकीय

असर समीक्षा: दशकों से एक ही स्थान पर नियुक्त शिक्षकों के आगे क्यों हारी सरकार

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रतिनियुक्ति तथा दस वर्षों से अधिक एक ही स्थान पर सेवा देने वाले शिक्षकों के आंकड़े तो एकत्र कर लिए परंतु लगता हैं कि यह एक ऐसा समूह हैं जिनके आगे सरकार भी पंगु महसूस कर रही हैं। जहां कुछ शिक्षक 20- 25 वर्षों से निदेशालय तथा जिला मुख्यालय में गैरशिक्षण कार्य हेतु विराजमान हैं। वहीं सैकड़ों शिक्षक अपनी नियुक्ति अथवा पदोन्नति पर पिछले 15 – 20 वर्षों से अपने ही गांव में डटे हैं और लगता हैं कि सेवानिवृत भी वही से होंगे। ऐसी परिस्थिति में प्रश्न पैदा होता हैं कि एक ही स्थान पर आजीवन सेवा करने वाले शिक्षक क्या अपने विद्यार्थियों को कुछ नया करवा पाते होंगे? साथ ही जहां शिक्षा में शैक्षणिक भ्रमण का भी अपना इतना महत्वपूर्ण स्थान हैं वहीं दूसरी ओर ऐसे स्थाई शिक्षक न स्वयं बदलना चाहते हैं न बदलाव लाना चाहते हैं कुछ ऐसे विद्यालय भी ही हैं जहां संख्या भी प्रयाप्त हैं सुविधाएं भी सरकार ने सभी प्रदान की हैं परंतु रूढ़िवादी विचारधार से ग्रसित इन स्थाई शिक्षकों के रवैए के कारण लाखों रुपए का नवाचार का सामान या तो डब्बाबंद हैं या उसका उपयोग ही नहीं होता एक शिक्षक ने अपना नाम न छपवाने की शर्त पर कहा कि आई सी टी तथा स्मार्ट कक्षाओं तक का उपयोग वर्षों से नहीं हो पा रहा हैं ।

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वर्षों से एक ही स्थान पर पड़े हुए कुछ विद्यालय प्रमुखों ने स्मार्ट कक्षाओं को या तो सामान्य कक्षाओं में परिवर्तित किया हैं या विद्यालय का स्टोर रूम में बना दिया हैं। कुछ शिक्षाविद् मानते हैं कि परिवर्तन नियति का नियम हैं और शहरी क्षेत्रों में अधिकतम पांच तथा ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम दस वर्षों तक ही एक शिक्षक को नियुक्त किया जाना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को कुछ नया मिल सके तथा शिक्षक भी नए संस्थान में जा कर कुछ नया अनुभव करे अन्यथा एक ही शिक्षक दो दो पीढ़ियों को पढ़ाएगा तो बाप बेटे की शिक्षा में क्या नया पन आएगा।

Deepika Sharma

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