

सब इंस्पेक्टर प्रेम सागर की कलम से
अकड़ के रहना, अपनी शान समझते हैं
दे मूछों को ताव , अपनी आन समझते हैं
तुमसे है रोशन, तुम्ही से है आबाद
हिंदुस्तान …………जिंदाबाद ।।
माटी से यह तिलक करते,
केसरी रंग लगाते हैं
राम की धरा पर जन्मे ,
गंगा में रोज नहाते हैं
वतन पर मर मिटना, अपनी आन समझते हैं
दे मूछों को ताव, अपनी शान समझते हैं
मां देती है दुआएं , बहन करती है फरियाद
हिंदुस्तान…………. जिंदाबाद।।
हिंदुस्तान …………..जिंदाबाद ।।
जय हिंद जय भारत…… प्रेम से



