Asar EXCLUSIVE; 1427 पद, 1427 ही पात्र अभ्यर्थी — फिर 3000 रुपये की परीक्षा शुल्क क्यों?
HPBOSE की LDR परीक्षा पर उठे सवाल

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) द्वारा घोषित Limited Direct Recruitment (LDR) Test 2025-26 अब खूब चर्चा में आ गया है। बोर्ड ने 1427 पदों के लिए परीक्षा आयोजित करने की अधिसूचना जारी की है, जबकि इन पदों के लिए कुल पात्र अभ्यर्थियों की संख्या भी 1427 ही बताई जा रही है। ऐसे में परीक्षा आयोजित करने और प्रत्येक अभ्यर्थी से ₹3000 परीक्षा शुल्क वसूलने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह परीक्षा केवल इन-सर्विस SMC शिक्षकों के लिए है, जो पहले से ही शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं और न्यूनतम पाँच वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हैं। पात्रता की शर्तें पहले से तय हैं और सभी अभ्यर्थी विभागीय रिकॉर्ड में पंजीकृत हैं। इसके बावजूद परीक्षा कराना और भारी शुल्क लेना समझ से परे बताया जा रहा है।

प्रतियोगिता नहीं, फिर परीक्षा क्यों?
जब पदों की संख्या और पात्र अभ्यर्थियों की संख्या समान है, तो विशेषज्ञों का सवाल है कि:
चयन प्रक्रिया में प्रतियोगिता कहाँ है?
परीक्षा का उद्देश्य क्या है?
क्या यह केवल औपचारिकता है?
लाखों रुपये की वसूली
1427 अभ्यर्थियों से ₹3000 की दर से लगभग 43 लाख रुपये की राशि वसूली जाएगी। विलंब शुल्क जोड़ने पर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। शिक्षकों का कहना है कि पहले से कम वेतन पर कार्यरत कर्मचारियों से इस प्रकार शुल्क लेना आर्थिक शोषण जैसा है।
सेवा में रहते हुए अतिरिक्त बोझ
SMC शिक्षक वर्षों से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देने के बावजूद अब उन्हें परीक्षा और शुल्क के बोझ से गुजरना पड़ रहा है। कई शिक्षकों का कहना है कि वरिष्ठता और सेवा अवधि के आधार पर समायोजन किया जा सकता था।
पारदर्शिता की कमी
अब तक बोर्ड की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि:
वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों की संख्या क्या है,
परीक्षा न होने की स्थिति में चयन क्यों संभव नहीं था,
शुल्क निर्धारण का आधार क्या है।
शिक्षक संगठनों में रोष
इस निर्णय को लेकर कुछ शिक्षक संगठनों में असंतोष है।इसे लेकर सबसुबाहट शुरू हो गई है, सूत्रों के अनुसार, जल्द ही इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की जा सकती है।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रान्त महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर* का कहना है कि शिक्षा बोर्ड ने प्रदेश के युवाओं से रोजगार के नाम पर लाखो रूपये इकठे करने का काम शुरू कर दिया है. यह प्रदेश के युवाओं के साथ धोखा है जो लोग वर्षो से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे है उनसे परीक्षा के नाम पर पैसा इकठा किया जा रहा है, जब पात्र ही 1427 है तो परीक्षा किस के लिए। परीक्षा के नाम पर 43 लाख इक्क्ठे करना समझ से परे है।प्रदेश के हजारों शिक्षकों का मानदेय पिछले तीन वर्षो से शिक्षा बोर्ड ने नहीं दिया है, परन्तु हर बार प्रदेश के युवाओं से पैसा इकठ्ठा कर लेते है
उधर इन पदों का सीधा प्रभाव बेरोजगारों मुख्यत बैच वाइज भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे लोगों पर पड़ेगा




