शिक्षा

समग्र शिक्षा के लिए हिमाचल 900 करोड़ और STATS प्रोजेक्ट के तहत 300 करोड़ लेने में हिमाचल कामयाब

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पीएम श्री स्कूल योजना की कैपेसिटी बिल्डिंग वर्कशाप समाप्त

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प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में ला रही क्रांतिकारी बदलाव, पीएम श्री योजना भी साबित होगी मददगार : राजेश शर्मा
शिमला
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि पीएम श्री स्कूल योजना ऐसे समय लागू की जा रही है जब प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। ऐसे में यह योजना हिमाचल में शिक्षा का परिदृश्य बदलने में मददगार साबित होगी। राजेश शर्मा ने पीएम श्री स्कूल योजना के तहत हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान ( HIPA) फेयर लांज में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के समापन समारोह की अध्यक्षता की।
राजेश शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार से अधिकतम वितीय मदद लेने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं और इसमें वे सफल भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह यह पहली बार हुआ है कि समग्र शिक्षा के लिए हिमाचल 900 करोड़ और STATS प्रोजेक्ट के तहत 300 करोड लेने में हिमाचल कामयाब रहा है। पीएम श्री योजना के तहत 350 करोड़ की ग्रांट ली जा रही है।

हिमाचल शिक्षा पर खर्च कर रहा है बजट का बड़ा हिस्सा
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि हिमाचल सरकार शिक्षा पर बजट का एक बडा हिस्सा खर्च कर रही है। प्रदेश के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जा रहा है। वहीं केंद्रीय ग्रांट अलग से हिमाचल को मिल रही है। इस तरह प्रदेश में शिक्षा के लिए धन की कमी नहीं है। ऐसे में हम सभी का दायित्व बनता है कि वे स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता के लिए मिलकर प्रयास करें।

राजेश शर्मा ने पीएम श्री स्कूल योजना के बारे में पीएम मोदी के संदेश का जिक्र करते हुआ कहा कि आप लोगों पर इस योजना की सफलता निर्भर करेगी। कार्यशाला में प्रशिक्षण लेने वाले डीपीओ, नोडल आफिसर, स्कूल प्रमुखों पर इस योजना को लागू करने की जिम्मेवारी रहेगी। वे मास्टर ट्रैनर के तौर पर इस योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने का का कार्य करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे डाइट स्तर पर भी इस तरह की कार्यशालाएं कराएं। इस तरह के प्रशिक्षण में शिक्षकों को आनलाइन भी प्रशिक्षित किया जा सकता है। उन्होंने राज्य नोडल अधिकारी डा. सुरेश ठाकुर को पीएम श्री स्कूल योजना को लागू करने लिए प्लानिंग बनाने को करने के निर्दश दिए।
राजेश शर्मा ने शिक्षकों का आवाहन किया कि वे हिमाचल में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों के पास अधोसरंचना और अच्छे क्वालिफाइड शिक्षक है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बढाने के लिए हम सभी मिलकर प्रयास करना होगा।
पीएम श्री स्कूल योजना के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. सुरेश ठाकुर ने कहा कि तीन दिनों तक चली यह कार्यशाला पीएम श्री स्कूल योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं। इनका काम डाइट लेवल पर स्कूल प्रमुखों को ट्रैन करना है, जिससे कि इन स्कूलों को किस तरह अनुकरणीय स्कूल बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों को कार्यशाला में दी गई प्रेजेंटेशन का मटेरियल डिजिटल और फिजिकली तौर पर सभी प्रतिभागियों को उपलब्ध करा दिया गया है।

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कार्यशाला में इनोवेशन, अस्समेंट, व्यावसायिक कोर्स, डिजिटल स्किल्स पर हुई चर्चा
कार्यशाला के आखिरी दिन स्कूलों में इनोवेशन, बच्चों के अस्समेंट, व्यावसायिक कोर्स, डिजिटल स्किल जैसे विषयों पर चर्चा की गई। विभिन्न रिसोर्स पर्सन्स ने इन सभी विषयों की विस्तार से प्रतिभागियों को जानकारी दी।
एआईसीटी के मयूर बोरकर ने पीएम श्री स्कूल योजना के अहम फीचर इनोवेशन इनिशिएटिव को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पीएम श्री स्कूलों में बच्चों की से आने वाले इनोवेटिव आईडिया को बढ़ावा और प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके लिए इन सभी स्कूलों में इनोवेशन काउंसिल गठित करनी होगी। देशभर से बेहतर आइडिया को शाटलिस्ट किया जाएगा और उनके लिए फंड प्रदान किया जाएगा।

पीएम श्री स्कूलों में बच्चों की अस्ससेंट पर रहेगा फोकस
एनसीईआरटी (PARAKH ) की असिस्टेंट प्रो. डा. पीयूष कमल और डा. प्रीतम प्यारी ने पीएम श्री स्कूलों में बच्चों की अस्समेंट के तौर तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बच्चों की अस्समेंट का विशेष तौर पर प्रावधान है। इसी अनुरूप पीएम श्री स्कूलों में भी बच्चों की असेसमेंट पर फोकस रहेगा और इनके बच्चों का समग्र आकलन किया जाएगा। स्कूलों में मौजूदा समय पर होने वाली अस्समेंट में सुधार किया जाएगा। अभी तक इन बच्चों का आकलन का आधार उनके हासिल अंक माना जाता है। लेकिन पीएम श्री स्कूलों में बच्चों का मात्रात्मक आकलन की बजाए इनका गुणात्मक, सतत, साक्ष्य आधारित आकलन किया जाएगा। बच्चों की क्षमताओं या दक्षताओं को पहचानकर कर उनके सीखने और विकास पर जोर रहेगा।
लैंड ए हैंड इंडिया की ओर अनुभव सिंह ने स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अब स्कूलों में पांच से छह ग्रेड से बच्चों को व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी जिससे बच्चे रोजगारपरक कौशल सीख सकें। इन बच्चों को इंडस्ट्री में इंटर्नशिप भी कराई जाएगी ताकि वे अपने ट्रेड का प्रैक्टिकल अनुभव भी सीख सके।
एडवर्ड स्कूल शिमला की शिक्षिका रीता डिसूजा और ममता कंवर ने प्रतिभागियों को डिजिटल स्किल सिखाई। उन्होंने कहा कि स्कूलों में डिटिजल तरीके से पढ़ाने के साथ ही उनका आकलन भी किया जा सकता है। शिक्षक अपने बच्चों के टेस्ट और रिपोर्ट भी ऑनलाइन ले सकते हैं। हालांकि बच्चों को सीखाने से पहले शिक्षकों को डिजिटल नॉलेज से लैस होना बेहद जरूरी है। उन्होंने एआई, साइबर सिक्योरिटी जैसे विषयों के बारे में भी बताया।

Deepika Sharma

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