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डॉ. राधा को बेयत नहरिन में वनस्पति विज्ञान के फेलो के रूप में नियुक्त किया गया

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सोलन, 13 मई
शूलिनी विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर और लिनियन सोसाइटी (एफएलएस) की फेलो डॉ. राधा को मेसोपोटामियाई विज्ञान और कला अकादमी, बेयत नहरिन में वनस्पति विज्ञान फेलो और अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। बेयत नहरिन एक अंतर्राष्ट्रीय अकादमी है जो मेसोपोटामिया क्षेत्र की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत को सम्मानित करने के लिए समर्पित है। यह विश्व भर के विद्वानों को सभ्यता की सबसे प्राचीन परंपराओं में निहित अनुसंधान, कला और ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए एक साथ लाती है।
डॉ. राधा की नियुक्ति उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक योग्यता, विशिष्ट अनुसंधान योगदान और वनस्पति विज्ञान के विकास के प्रति समर्पित सेवा को मान्यता देती है। उनका शोध एक महत्वपूर्ण संगम पर स्थित है: प्राचीन पादप ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के माध्यम से प्रमाणित करना, विशेष रूप से हिमालयी पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का दस्तावेजीकरण करने वाला उनका कार्य।
इस सम्मान के बारे में बात करते हुए डॉ. राधा ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारतीय अनुसंधान और औषधीय पौधों तथा पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए सम्मान की बात है। इससे मुझे हिमालयी विरासत को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय से जोड़ने वाले कार्य में और अधिक गहराई से उतरने की प्रेरणा मिलती है। मैं शूलिनी के संस्थापक कुलाधिपति प्रो. पी.के. खोसला, कुलपति प्रो. अतुल खोसला, रजिस्ट्रार प्रो. सुनील पुरी, अनुसंधान डीन और संपूर्ण शूलिनी परिवार को उनके निरंतर समर्थन और मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद देती हूं।”
मेसोपोटामिया की विरासत को संरक्षित करने और ज्ञान, नवाचार और कला के माध्यम से भावी पीढ़ियों को प्रेरित करने का अकादमी का मिशन, शूलिनी में डॉ. राधा द्वारा अपनाए गए अनुसंधान दर्शन को बारीकी से प्रतिबिंबित करता है। उनका कार्य पारंपरिक पादप ज्ञान को दृश्यमान, प्रमाणित और प्रासंगिक बनाता है, ऐसे समय में जब दुनिया तेजी से स्वदेशी विज्ञान की ओर उत्तरों की तलाश कर रही है।
Deepika Sharma

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