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शूलिनी विश्वविद्यालय में महाराष्ट्र के लोक नृत्य और राजनीति पर सत्र आयोजित

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शूलिनी विश्वविद्यालय में बेलेट्रिस्टिक शूलिनी लिटरेचर सोसाइटी द्वारा “महाराष्ट्र के लोक नृत्य और इसके प्रदर्शन की राजनीति” विषय पर एक सत्र की मेजबानी की गयी । इस कार्यक्रम का उद्देश्य महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत और इसके पारंपरिक नृत्यों से जुड़ी सामाजिक गतिशीलता पर प्रकाश डालना था।

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सत्र की मुख्य वक्ता श्रीमति सेजल माधवी यादव थीं, जिन्होंने महाराष्ट्र के विभिन्न लोक नृत्यों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहलुओं पर गहराई से अपने विचार साझा किए। श्रीमति यादव की प्रस्तुति ने इन कला रूपों के महत्व और क्षेत्र के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य के साथ उनके संबंधों के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की।

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शूलिनी विश्वविद्यालय से प्रोफेसर धर अपनी गहन टिप्पणियों को साझा किया, जिससे बातचीत और समृद्ध हुई। स्कूल ऑफ चित्रकूट लिबरल आर्ट्स की प्रमुख डॉ. पूर्णिमा बाली ने अपने समापन भाषण में शुद्ध लोक नृत्य रूपों की प्रामाणिकता को संरक्षित करने और फिल्म अध्ययन के क्षेत्र में उनके अनुकूलन के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखने के महत्व को व्यक्त किया।

Deepika Sharma

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