शिक्षा

असर विशेष: प्रदेश में 455 स्कूलों में शिक्षक ही नहीं जबकि 3148 स्कूल एक शिक्षक के सहारे चल रहे

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प्रदेश में लगभग 455 स्कूलों में शिक्षक ही नहीं है जबकि 3148 स्कूल एक शिक्षक के सहारे चल रहे है। लिहाजा सरकार द्वारा की जाने वाली नियुक्तियां स्कूलों में शिक्षा की मजबूती को लेकर काफी लाभप्रद सिद्ध हो सकती है इसे लेकर

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हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा है की कैबिनेट से 5291 पदों को प्रारंभिक शिक्षा विभाग में स्वीकृत करने जिसमें टीजीटी आर्ट्स के 1070 टीजीटी नॉन मेडिकल के 776 टीजीटी मेडिकल के 430 शास्त्री के 494 तथा जीबीटी के 2521 पदों को स्वीकृत करने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला लिया है क्योंकि शिक्षा विभाग में लंबे समय से 15,000 से अधिक शिक्षकों के पद खाली चल रहे थे इससे पहले भी हिमाचल सरकार ने माननीय मुख्यमंत्री सुखविंदर  की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट में प्रारंभिक शिक्षा विभाग में ही शिक्षकों के 3301 पदों को स्वीकृत कर राहत देने का प्रयास किया था तथा उच्च शिक्षा विभाग में प्रवक्ताओं के 530 पदों को भी स्वीकृत कर शिक्षक हित में एक बहुत बड़ा फैसला लिया है जिसके लिए हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ सरकार की सराहना करता है और उसका धन्यवाद करता है साथ ही चौहान ने कहा कि पिछले कल 401 प्रवक्ताओं के पदों पर पदोन्नति कर टीजीटी वर्ग को एक बहुत बड़ी सौगात दी है जिसके लिए संघ कई दिनों से मांग कर रहा था ।

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चौहान ने कहा कि प्रदेश में लगभग 455 स्कूलों में शिक्षक ही नहीं है जबकि 3148 स्कूल एक शिक्षक के सहारे चल रहे है इसलिए सरकार द्वारा नई नियुक्तियों के लिए पदों को सृजित करना एक छात्र हित में लिया गया बहुत बड़ा फैसला है और इससे सिद्ध होता है कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री   रोहित ठाकुर वास्तव में शिक्षा को लेकर चिंतित है और इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहे हैं ।

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ये है मांगों का पिटारा

एसएमसी शिक्षकों व कंप्यूटर शिक्षकों के लिए पॉलिसी बनाकर उन्हें नियमित किया जाए या फिर उन्हें नियमित के बराबर स्केल प्रदान किया जाए जिससे इन वर्गों के शिक्षकों को राहत मिल सके साथ ही यह भी मांग की के 2017 के बाद पदोन्नत प्रधानाचार्य को नियमित किया जाए उनकी पदोन्नतिया अभी तक 6 साल बीत जाने के बाद भी नियमित नहीं हुई है जिससे उनको किसी तरह का लाभ नहीं मिल रहा है इसलिए इस दिशा में भी माननीय शिक्षा मंत्री से निवेदन किया जाता है कि इन्हें तुरंत नियमित करने के लिए प्रयास किए जाएं इसके अतिरिक्त प्री प्राइमरी एजुकेशन जिसमें हिमाचल प्रदेश में तीन सालों मे 58000 बच्चे दाखिल ले चुके है और 5500 स्कूलों में प्री प्राइमरी कक्षाएं चल रही है इसलिए इन स्कूलों में नर्सरी ट्रेन टीचर्स की भर्ती विभाग नियमित तौर पर करें जिससे शिक्षा को और सुदृढ़ कर गुणवत्ता शिक्षा प्रदान की जा सके चौहान ने कहा जिस तरह से शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री निर्णय ले रहे हैं वह बहुत ही साहसिक और सराहनीय है संघ उसका स्वागत करता है ।

 

Deepika Sharma

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