पोस्ट…

असर पर बेबाक आवाज़…
यदी सचमुच ऐसा है तो विचाराधारा और विज़न की भिन्नता एक को राष्ट्रवादी और दूसरे को राष्ट्रद्रोही कैसे परिभाषित कर सकती है और चुनावों में अक्सर इसे मुद्दा क्यूं बनाया जाता है, राजनैतिक दलों द्वारा।