असर विशेष: शायद शिक्षा बोर्ड भी नहीं चाहता कि CBSE की परीक्षा दें शिक्षक

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा CBSE से मान्यता हेतु चयनित विद्यालयों में प्रतिनियुक्ति हेतु 22 मार्च को आयोजित होने वाली परीक्षा के लिय हिमाचल शिक्षा बोर्ड द्वारा गठित परीक्षा केंद्रों पर बवाल खड़ा हो गया हे मात्र तीन दिन पूर्व पिछले कल जारी किए गए एडमिट कार्ड में शिक्षकों को जिले से बहार परीक्षा केंद्र दिए गए ।सबसे अधिक आश्चर्य है कि खराब मौसम के वावजूद किन्नौर जिला के परीक्षार्थियों को धर्मशाला,सिरमौर के परीक्षार्थियों को शिमला तथा सोलन , ऊना जिला के परीक्षार्थियों को कांगड़ा जिला में परीक्षा देनी होगी ।साथ ही बहुत से शिक्षक ऐसे भी हैं जिनकी बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी है तथा उन्हें दूसरे दिन यानी 23 मार्च को अपने परीक्षा केंद्र में परीक्षा भी आयोजित करनी हे कुछ शिक्षक परीक्षा केंद्र अधीक्षक तथा केंद्र समन्वयक है जो बोर्ड के नियमों के अनुसार परीक्षा केंद्र छोड़ कर नहीं जा सकते ।जब शिक्षा बोर्ड को यह सभी कुछ मालूम था तो इस प्रकार से परीक्षा केंद्र आबंटित क्यों किए। माना कि कुछ विषयों में परीक्षार्थियों की संख्या कम है परंतु इस प्रकार से विभिन्न विषयों की परीक्षा का आयोजन दसवीं तथा 12वीं कक्षा की परीक्षाओं में भी होता हैं तथा बोर्ड द्वारा सीमित मात्रा में सभी केंद्रों पर अलग अलग विषयों के प्रश्न पत्र दिए जाते हे। इस प्रकार दूर दराज क्षेत्रों में परीक्षा केंद्रों के आबंटन से शिक्षकों में संदेह है कि कहीं जानबूझ कर बोर्ड द्वारा ऐसे केंद्र आबंटित तो नहीं किए गए ताकि कम शिक्षक परीक्षा दे। कारण कुछ भी रहे हो लगभग परंतु बोर्ड द्वारा 55 से साठ लाख रूपये का परीक्षा शुल्क एकत्र कर कम से कम जिला स्तर पर तो परीक्षा केंद्र आबंटित किय ही जा सकते थे।
हिमाचल प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ राज्य चेयरमैन सुरेन्द्र पुंडीर ने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यद्यपि यह मामला माननीय उच्च न्यायालय के विचाराधीन है जिस पर आज भी बहस होनी हे तथापि विपरीत मौसम के वावजूद भी इस प्रकार से दूर दराज के क्षेत्रों में परीक्षा केंद्रों का आबंटन निश्चित रूप से इस परीक्षा के आयोजन में बहुत बड़ी बाधा बनेगा अतः बोर्ड सचिव को त्वरित कार्रवाई कर सभी शिक्षकों तथा सभी विषयों के परीक्षार्थियों के लिय जिला स्तर पर परीक्षा केंद्र बनाने चाहिए।




