
*डीजीपी अशोक तिवारी ने ईमानदारी, भ्रष्टाचार की रोकथाम, निष्पक्ष पुलिसिंग और जवाबदेही पर दिया जोर*
शिमला, 27 अक्टूबर 2026: हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक सतर्कता जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम “सत्यनिष्ठा से समृद्धि” (Probity for Prosperity) है। सप्ताह के दौरान पुलिस संगठन और आम जनता के बीच ईमानदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही तथा भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता का संदेश पहुंचाने के लिए राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
सप्ताह की शुरुआत राज्यभर में सतर्कता जागरूकता शपथ के साथ हुई। पुलिस मुख्यालय और सतर्कता मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक, हिमाचल प्रदेश, श्री अशोक तिवारी, आईपीएस ने पुलिस अधिकारियों, जवानों तथा मंत्रालयिक कर्मचारियों को शपथ दिलाई। राज्य के सभी पुलिस इकाइयों में भी इसी प्रकार शपथ कार्यक्रम आयोजित किए गए।
अभियान के तहत पुलिस इकाइयों द्वारा सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों के साथ जागरूकता कार्यक्रम और जनसंपर्क गतिविधियां की जा रही हैं। लोगों तक संदेश पहुंचाने के लिए प्रमुख स्थानों पर बैनर, होर्डिंग और जागरूकता सामग्री भी प्रदर्शित की जा रही है।
डीजीपी: ईमानदारी केवल शपथ तक सीमित न रहे
इस अवसर पर डीजीपी श्री अशोक तिवारी ने कहा कि भ्रष्टाचार हमेशा रिश्वत लेने से ही शुरू नहीं होता। यह गलत कार्य को नजरअंदाज करने, जांच में हेरफेर करने, प्रभावशाली व्यक्ति को अनुचित लाभ देने या किसी अनियमितता को सामान्य मान लेने से भी शुरू हो सकता है।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से एफआईआर दर्ज करने, जांच करने, गिरफ्तारी तथा आम जनता से व्यवहार के दौरान निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने का आह्वान किया।
डीजीपी ने भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए सतर्कता पर जोर देते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावी पर्यवेक्षण, नियमित निरीक्षण, जांच और केस डायरी की समीक्षा, पारदर्शी प्रशासनिक निर्णय तथा शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई के माध्यम से अनियमितताओं की संभावना को पहले ही पहचाना जाए।
उन्होंने कहा कि CCTNS, तकनीक और डिजिटल रिकॉर्ड केवल औपचारिकता न रहें, बल्कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बनें।
अधीनस्थों और नागरिकों के साथ निष्पक्ष व्यवहार जरूरी
डीजीपी ने पुलिस संगठन में अधिकारियों और अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ-साथ आम नागरिकों के प्रति निष्पक्ष व्यवहार को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि योग्यता और मेहनत को उचित सम्मान मिले, कदाचार पर निष्पक्ष कार्रवाई हो तथा पुलिस कर्मी बिना किसी भय के गलत कार्य की जानकारी दे सकें।
उन्होंने कहा कि नागरिकों को न्याय के लिए किसी प्रभाव, पहचान या सिफारिश पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
ईमानदारी के साथ कार्यकुशलता भी जरूरी
श्री तिवारी ने कहा कि केवल व्यक्तिगत ईमानदारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कार्यकुशलता और समयबद्ध कार्रवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। एफआईआर दर्ज करने में अनावश्यक देरी, जांच में लापरवाही, शिकायतकर्ता की अनदेखी या बिना उचित कारण मामलों को लंबित रखना भी सार्वजनिक कर्तव्य में कमी माना जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जनता को ऐसी पुलिस चाहिए जो ईमानदार, सक्षम, संवेदनशील, तत्पर और जवाबदेह हो।
अपने संदेश के अंत में डीजीपी ने प्रत्येक पुलिस अधिकारी से, थाना प्रभारी से लेकर डीजीपी तक, प्रतिदिन स्वयं से यह सवाल पूछने का आह्वान किया:
«“क्या आज मैंने अपने अधिकार का इस्तेमाल किसी व्यक्ति का जीवन बेहतर बनाने, कानून का पालन कराने और न्याय दिलाने के लिए किया—या केवल अपने पद को सुरक्षित रखने के लिए?”»
उन्होंने कहा कि सत्यनिष्ठा की वास्तविक परीक्षा सतर्कता जागरूकता सप्ताह में ली गई शपथ से नहीं, बल्कि उन फैसलों से होती है जो कोई देख नहीं रहा होता।
हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा 1 नवंबर 2026 तक राज्यभर में जागरूकता और जनसंपर्क अभियान जारी रहेगा। इसका उद्देश्य पुलिस संगठन में ईमानदारी, पारदर्शिता, कार्यकुशलता और जन-जवाबदेही की संस्कृति को और मजबूत करना है।


