बड़ी ख़बर: शिमला में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का मामला दर्ज, तत्कालीन एसपी के खिलाफ FIR
कांस्टेबल के 1.87 लाख रुपये के भुगतान में अनियमितता का आरोप, फंड से 2.35 लाख रुपये की निकासी की भी जांच

शिमला। पुलिस थाना सदर शिमला में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के खिलाफ कथित धोखाधड़ी, सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। यह मामला पुलिस लाइन कैथू में तैनात एक कांस्टेबल की शिकायत और संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के आधार पर दर्ज हुआ है। मामले में शिकायतकर्ता और आरोपी के नाम का खुलासा नहीं किया गया है।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 और 2025 के दौरान कांस्टेबल को सरकारी कार्यों और व्यवस्थाओं के लिए आवश्यक सामान जुटाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके लिए उन्हें अपनी जेब से खर्च करने और बाद में भुगतान किए जाने का आश्वासन दिया गया था। कांस्टेबल ने इन व्यवस्थाओं पर कुल 1,87,890 रुपये खर्च किए और संबंधित बिल कार्यालय में जमा करवाए। आरोप है कि जांच के बाद इन बिलों को भुगतान के लिए मंजूरी भी मिल गई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि 6 फरवरी 2026 को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने उन्हें भुगतान से संबंधित वाउचर पर हस्ताक्षर करने के लिए बुलाया। उन्हें बताया गया कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए हस्ताक्षर जरूरी हैं और स्वीकृत राशि उन्हें मिल जाएगी। हालांकि, हस्ताक्षर करने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं किया गया।
फंड से निकले पैसे, कांस्टेबल को नहीं मिला भुगतान
शिकायतकर्ता के अनुसार, जुलाई 2026 में मामला उठाने के बाद जब उन्होंने कार्यालय की अकाउंट ब्रांच से जानकारी ली, तो पता चला कि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी, लेकिन उनके खाते में जमा नहीं हुई। इसके चलते उन्हें अपनी स्वीकृत राशि नहीं मिल सकी और निजी संसाधनों से अपनी देनदारियां चुकानी पड़ीं।
शिकायत के बाद वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, जिला पुलिस के एक फंड से करीब दो वर्षों के दौरान कुल 2,35,000 रुपये की कथित अवैध निकासी हुई थी। आरोप है कि इस राशि को किन उद्देश्यों के लिए खर्च किया गया, इसका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इससे संबंधित फंड में धन की कमी होने की बात सामने आई।
स्वीकृत बिलों की राशि फंड में स्थानांतरित करने का आरोप
रिकॉर्ड के अनुसार, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक का शिमला से कार्मिक विभाग में स्थानांतरण होने के समय फंड की कथित कमी को पूरा करने के लिए शिकायतकर्ता के स्वीकृत बिलों की राशि निकालकर संबंधित फंड के खाते में स्थानांतरित कर दी गई। आरोप है कि यह राशि कांस्टेबल को भुगतान करने के बजाय फंड में जमा करवाई गई, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
प्रथम दृष्टया वित्तीय रिकॉर्ड की जांच में धोखाधड़ी, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और भुगतान की स्वीकृत राशि के हस्तांतरण से संबंधित अनियमितताओं के तथ्य सामने आए हैं।
22 अक्टूबर को दर्ज हुआ मामला
इन तथ्यों के आधार पर पुलिस थाना सदर शिमला में 22 अक्टूबर 2026 को अभियोग संख्या 138/2026 दर्ज किया गया है। मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 314, 318, 336 और 340 के तहत दर्ज हुआ है। ये धाराएं आपराधिक विश्वासघात, बेईमानी से धन के इस्तेमाल, धोखाधड़ी और जाली दस्तावेजों से संबंधित विभिन्न अपराधों से जुड़ी हैं।
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच जारी है। आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर होगी।


