असर विशेष: सलाखों के पीछे हुनर की नई उड़ान, कंडा जेल के कैदियों के उत्पाद पहुंचे AG ऑफिस

कोई बना रहा है केक-बिस्कुट, तो कोई तराश रहा है फर्नीचर; मेहनत से कमाई का 40 फीसदी हिस्सा कैदियों के खातों में होता है जमा
शिमला। सलाखों के पीछे जिंदगी भले ही सीमित हो, लेकिन हुनर के जरिए भविष्य संवारने की उम्मीदें सीमित नहीं हैं। कंडा जेल में कैदियों के हाथों से तैयार हो रहे बेकरी उत्पाद, गर्म कपड़े, हस्तशिल्प और फर्नीचर अब उनकी मेहनत और हुनर की नई पहचान बन रहे हैं। कैदियों द्वारा तैयार इन उत्पादों को शिमला स्थित महालेखाकार कार्यालय (AG Office) में बिक्री एवं प्रदर्शन के लिए रखा गया है। यहां हिमकारा स्टोर के उद्घाटन एवं समारोह के माध्यम से इन उत्पादों को लोगों
तक पहुंचाने की पहल की जा रही है।
कैदियों को मिल रहा रोजगारपरक प्रशिक्षण
कंडा जेल में कैदियों को बेकरी उत्पाद बनाने से लेकर फर्नीचर और हस्तशिल्प तैयार करने तक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जेल प्रशासन का उद्देश्य कैदियों को उनके समय का सदुपयोग करने का अवसर देने के साथ-साथ ऐसे हुनर सिखाना है, जो रिहाई के बाद उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद कर सकें। इसके लिए 20 से 26 कैदियों के समूह बनाकर अलग-अलग कौशल का प्रशिक्षण दिया जाता है। खास बात यह है कि युवा कैदी भी इन गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।
मेहनत का मिल रहा आर्थिक लाभ
इन उत्पादों की बिक्री से होने वाली कमाई का 40 प्रतिशत हिस्सा कैदियों के खातों में जमा किया जाता है। इससे उन्हें अपनी मेहनत का आर्थिक लाभ मिलता है और जेल से बाहर निकलने के बाद नए सिरे से जीवन शुरू करने का संबल भी मिलता है। कंडा जेल में तैयार होने वाले फर्नीचर सहित विभिन्न उत्पादों को बिक्री के लिए उपलब्ध करवाया जा रहा है। वहीं, सर्दियों के मौसम में शॉल, स्टॉल और टोपियों की मांग भी बढ़ जाती है।
सजा के बाद नई जिंदगी की तैयारी
जेल में चल रहे ये प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम हैं। बेकरी, फर्नीचर और हस्तशिल्प जैसे कामों में दक्षता हासिल कर कैदी अपने भविष्य के लिए रोजगार के विकल्प तैयार कर रहे हैं।
कंडा जेल में तैयार हो रहे ये उत्पाद इस बात का उदाहरण हैं कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर व्यक्ति अपनी जिंदगी को नई दिशा दे सकता है। मकसद सिर्फ सामान बेचना नहीं, बल्कि हुनर के सहारे कैदियों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज में सम्मान के साथ नई शुरुआत करने का अवसर देना है।
डिम्पल सूद



