सम्पादकीय

असर सम्पादकीय : लॉर्ड्स और ओवल क्रिकेट मैदान- एक सुखद अनुभव अनुभव

रिटायर्ड मेजर जनरल एके शोरी की कलम से

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लंदन में स्थित लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड और ओवल क्रिकेट ग्राउंड दोनों ही क्रिकेट जगत का केंद्र या घर हैं। किसी भी क्रिकेटर के लिए इन मैदानों पर खेलना जीवन भर की उपलब्धि जैसा है। यदि कोई क्रिकेटर इन मैदानों पर शतक लगाता है या एक पारी में पांच या अधिक विकेट लेता है या फिर कैच लेने में भी ऐसा ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है, तो उसका नाम इतिहास की किताबों में दर्ज कर दिया जाता है। लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड, सेंट जॉन्स वुड में एक क्रिकेट स्थल है, इसका नाम इसके संस्थापक, थॉमस लॉर्ड के नाम पर रखा गया है, इसका स्वामित्व मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के पास है। लॉर्ड्स में दुनिया का सबसे पुराना खेल संग्रहालय है। लॉर्ड्स ने जून 2000 में अपने सौवें टेस्ट मैच की मेजबानी की, जिसमें इंग्लैंड ने वेस्टइंडीज को दो विकेट से हराया; यह मैच दूसरे दिन गिरे 21 विकेटों के लिए भी उल्लेखनीय था, जो 1888 के बाद से लॉर्ड्स टेस्ट में एक दिन में गिरे सबसे अधिक विकेट थे। ओवल, केंसिंग्टन में एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान है। 1845 में खुलने के बाद से ओवल सरे काउंटी क्रिकेट क्लब का घरेलू मैदान रहा है। सितंबर 1880 में अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट की मेजबानी करने वाला यह इंग्लैंड का पहला मैदान था। अंग्रेजी सीज़न का अंतिम टेस्ट मैच पारंपरिक रूप से वहां खेला जाता है। इस स्थान पर पहला एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच 7 सितंबर 1973 को इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया था। इसने 1975, 1979, 1983 और 1999 विश्व कप के मैचों की मेजबानी की।
टिकट बुकिंग
लंदन आने से पहले मैंने घूमने के स्थानों की एक सूची बनाई और लॉर्ड्स के साथ-साथ ओवल क्रिकेट मैदान भी निश्चित रूप से मेरी सूची में था। कोई भी व्यक्ति टिकट का भुगतान करके इन मैदानों की यात्रा कर सकता है। लेकिन मुझे पहले से पता था कि महिला टी-20 वर्ल्ड कप जून में इंग्लैंड में हो रहा है और दो ग्रुप मैच और सेमीफाइनल और फाइनल भी इन्हीं मैदानों पर होंगे. इसलिए मैंने ऐतिहासिक स्थानों पर क्रिकेट मैच देखने की योजना बनाई। मैंने ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) की वेबसाइट पर एक अकाउंट बनाया और जब मैंने टिकट बुक करने की कोशिश की, तो मुझे मेल द्वारा आगे की कार्रवाई के लिए मोबाइल पर ICC APP डाउनलोड करने की सलाह दी गई। मैंने ऐप डाउनलोड किया और वेस्टइंडीज और इंग्लैंड टीमों के बीच लॉर्ड्स में खेले जा रहे ग्रुप मैच को बुक करने का प्रयास किया। ऐप बहुत आसान व् अनुकूल है क्योंकि इससे मुझे स्टैंड, पंक्ति और सीट चुनने में सुविधा हुई। भुगतान के कई विकल्प थे, इसलिए मैंने टिकट बुक किया और मेरे मोबाइल ऐप पर पुष्टीकरण के साथ-साथ विवरण भी मिला और एक संदेश भी कि क्यू आर कोड की जानकारी मैच से एक दिन पहले साझा की जाएगी और जहां तक टिकट की कीमत का सवाल है तो मैंने उस विशेष स्टैंड के लिए चालीस पाउंड का भुगतान किया और यह अच्छा था क्योंकि वहां से सब कुछ स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।
मैच का दिन और प्रवेश
मैच से एक दिन पहले मेरे मोबाइल पर एक क्यूआर कोड आया और दोनों क्रिकेट मैदानों का साझा अनुभव बहुत सुखद था। मैं यह साझा नहीं कर रहा हूं कि कैसे पहुंचा जाए क्योंकि कोई भी अपने गंतव्य से जा रहा होगा, लेकिन लॉर्ड्स के लिए करीबी ट्यूब स्टेशन सेंट जेम्स हैं और ओवल के लिए केंसिंग्टन है। प्रिय पाठकों, मुझे दोनों स्टेडियम में और उसके आसपास एक भी पुलिसकर्मी/महिला नहीं मिली और मैं सोच रहा था कि हमारे देश में कानून और व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और किसी भी अप्रिय घटना के लिए स्थानीय पुलिस और यहां तक कि अर्धसैनिक बल की तैनाती होती है। दोनों स्थानों पर, ट्यूब स्टेशनों के ठीक बाहर, दो स्वयंसेवक थे जो मार्गदर्शन कर रहे थे कि किस दिशा में जाना है। ओवल मैदान नजदीक ही है जबकि लॉर्ड्स के लिए करीब 400 मीटर पैदल चलना पड़ता है र एक बार जब मैं गेट के पास पहुंचा तो वहां बहुत सारे संकेतक थे जो बताते थे कि स्टैंड किस तरफ/दिशा में है और सीट नंबर के साथ प्रवेश द्वार भी । हालाँकि फिर भी मैंने एक वालंटियर को बताने के लिए कहा क्योंकि यह हम भारतीयों की सामान्य आदत है कि हम अनावश्यक रूप से चीजों की पुष्टि करते है।
जब मैंने लॉर्ड्स के मुख्य द्वार से प्रवेश किया तो वहां खेल, प्रश्नोत्तरी, अन्य समान आदि के लिए कई स्टॉल लगे थे और दीवारों पर महान क्रिकेटरों की तस्वीरें उनकी उपलब्धियों के संक्षिप्त विवरण के साथ प्रदर्शित की गई थीं। स्टेडियम के अंदर बड़े आराम से अपनी सीट पर जाकर बैठ गया। बेशक मुख्य द्वार के पास क्यूआर कोड स्कैन किया गया था और वहां एक उचित कतार थी इसलिए कोई इंतजार, धक्का-मुक्की आदि नहीं हुई। मेरे पास एक बैग पैक था जिसे भी जांचा और स्कैन किया गया था, चूंकि खाने और पीने के पानी की अनुमति है इसलिए मेरे पास आवश्यक सामान था। पिछले कुछ दिनों से तापमान थोड़ा ज्यादा था इसलिए मोबाइल पर मैसेज आ रहा था कि पीने का पानी रखें और स्टेडियम के अंदर भी पानी के कई प्वाइंट उपलब्ध होंगे।
मनभावन वातावरण
सज्जनो, स्टेडियम को देखकर मुझे बहुत खुशी और रोमांच महसूस हुआ। धर्मशाला का स्टेडियम भी बहुत अच्छा है क्योंकि यह पहाड़ियों की चोटियों से घिरा हुआ है लेकिन इन दोनों के पीछे इतिहास है। बियर तो वहां पानी की तरह पी जाती है और खाने के भी काफी स्टाल थे और मै भी घर से सैंडविच ले कर गया था , इसलिए बियर पीते हुए और सैंडविच खाते हुए मैच देखने का एक अलग ही लुत्फ था। जब इंग्लैंड खेल रहा था तो भीड़ बहुत अनुशासित थी, निश्चित रूप से शोर भी खूब था, डांस और म्यूजिक का अपना अंदाज था। वहां और भारतीय स्टेडियम में जो मुख्य अंतर मैंने देखा वह अनुशासन, ग्राहक अनुकूल वातावरण, साफ-सफाई, सहायक रवैया और आयोजकों की प्रतिक्रिया। और जैसा कि मैंने पहले भी बताया है, मुझे कोई सुरक्षाकर्मी नहीं मिला, हालांकि ड्यूटी पर बहुत कम ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी थे, लेकिन वे सिर्फ दिशा-निर्देश दे रहे थे। मैच के बाद मुझे आईसीसी से मेरे मेल पर फीडबैक प्रोफार्मा मिला ताकि अगर कोई कमी हो तो भविष्य में उस पर ध्यान दिया जा सके। संक्षेप में, यह एक सपने के सच होने और एक बहुत ही सुखद अनुभव था।

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Deepika Sharma

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