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बड़ी ख़बर: “प्रसूता की मृत्यु “ पर नहीं करवाया “पोस्टमार्टम”

“एम्नियोटिक फ्लूइड एम्बोलिज़्म “ जैसी दुर्लभ जटिलता का मामला हो सकता है, अफवाहों से बचें: SAMDCOT

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स्टेट एसोसिएशन ऑफ मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज टीचर्स (SAMDCOT) ने क्षेत्रीय अस्पताल, कुल्लू में प्रसूता की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे अत्यंत दुखद और पीड़ादायक घटना बताया है। संगठन ने दिवंगत महिला के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि उपलब्ध चिकित्सकीय तथ्यों के अनुसार यह मामला एम्नियोटिक फ्लूइड एम्बोलिज़्म (Amniotic Fluid Embolism) जैसी अत्यंत दुर्लभ, अचानक होने वाली और उच्च मृत्यु-दर वाली प्रसूति जटिलता का प्रतीत होता है, जिसमें समय पर और सर्वोत्तम चिकित्सा मिलने के बावजूद भी कई बार मरीज को बचाया नहीं जा सकता।

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SAMDCOT के अध्यक्ष डॉ. बलबीर सिंह वर्मा और महासचिव डॉ. पीयूष कपिला ने संयुक्त बयान में कहा कि उपचाररत चिकित्सकों ने मृत्यु के वास्तविक कारण की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम कराने का अनुरोध किया था, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार परिजनों ने इसके लिए सहमति नहीं दी। ऐसे में बिना वैज्ञानिक साक्ष्यों और विशेषज्ञ जांच के किसी चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाना या निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

संगठन ने कहा कि वह निष्पक्ष, पारदर्शी और विशेषज्ञों द्वारा की जाने वाली जांच का पूर्ण समर्थन करता है। यदि जांच में किसी भी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही सिद्ध होती है तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी चिकित्सक को दोषी ठहराना या जनदबाव में दंडात्मक कार्रवाई करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

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SAMDCOT ने अस्पतालों में विरोध-प्रदर्शन, चिकित्सकों के खिलाफ भीड़ जुटाने और जांच पूरी होने से पहले दोष तय करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। संगठन का कहना है कि इससे निष्पक्ष जांच प्रभावित होती है, अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होती हैं और चिकित्सकों में भय एवं असुरक्षा का वातावरण पैदा होता है। साथ ही कई मामलों में विभिन्न संगठनों अथवा राजनीतिक हितों से जुड़े तत्वों के सक्रिय होने से संवेदनशील घटनाएं अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग ले लेती हैं।

संगठन ने राज्य सरकार और प्रशासन से चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य संस्थानों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों की प्रतीक्षा करने का आग्रह किया। SAMDCOT ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी दोषी को बचाना नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की रक्षा करना है।

संगठन ने समाज से भी अपील की कि इस संवेदनशील मामले में संयम बनाए रखें, अफवाहों से बचें और न्यायिक व वैज्ञानिक प्रक्रिया पर विश्वास रखें।

इसके साथ ही SAMDCOT ने मांग की है कि विभागीय जांच पूरी होने और चिकित्सकीय लापरवाही विधिवत प्रमाणित होने से पहले संबंधित चिकित्सक का निलंबन तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। यदि निष्पक्ष जांच के लिए आवश्यक हो तो चिकित्सक को जांच अवधि के दौरान प्रशासनिक अवकाश या अन्य गैर-दंडात्मक व्यवस्था पर रखा जा सकता है। संगठन का कहना है कि केवल आरोपों या जनदबाव के आधार पर किया गया निलंबन प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और इससे चिकित्सकों का मनोबल प्रभावित होने के साथ-साथ आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

Deepika Sharma

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