सेंट थॉमस स्कूल, शिमला में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर CBSE इन-हाउस वर्कशॉप हुई आयोजित

सेंट थॉमस स्कूल, शिमला ने कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में असेसमेंट और पढ़ाने के तरीकों (पेडागोजी) पर एक CBSE इन-हाउस वर्कशॉप आयोजित की गयी । इसका मकसद पढ़ाने के नए तरीकों और असेसमेंट के तरीकों के बारे में शिक्षकों की समझ को बेहतर बनाना था।
वर्कशॉप की शुरुआत दीप प्रजवल्लित कर की गयी। प्रिंसिपल श्रीमती शैरन नंदा ने, जजों और भाग लेने वाले शिक्षकों का स्वागत किया। उन्होंने आज की शिक्षा में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला और छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने वाले कौशल सिखाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
इस कार्यक्रम में सेंट थॉमस स्कूल के शिक्षकों के साथ-साथ कई अन्य संस्थानों के शिक्षकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न पहलुओं पर केस स्टडी और रिसर्च पेपर पेश किए। इनमें क्लासरूम में पढ़ाने के नए तरीके, उभरती हुई तकनीकें, असेसमेंट की रणनीतियाँ और पढ़ाने-सीखने की प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करने जैसे विषय शामिल थे।
इन प्रेजेंटेशन ने शिक्षकों को विचार साझा करने, अनुभव बताने और क्लासरूम में CT और AI कॉन्सेप्ट को लागू करने के बेहतरीन तरीकों पर चर्चा करने के लिए एक अच्छा मंच प्रदान किया। वर्कशॉप में छात्रों में क्रिटिकल थिंकिंग, समस्या सुलझाने की क्षमता, क्रिएटिविटी और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के महत्व पर ज़ोर दिया गया, ताकि उन्हें तेज़ी से तकनीक-प्रधान होती दुनिया की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार किया जा सके।
प्रतिभागियों ने दिखाया कि कैसे एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग, प्रोजेक्ट-बेस्ड अप्रोच और असल दुनिया की समस्याओं को सुलझाने वाले सिनेरियो के ज़रिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्रभावी ढंग से पेश किया जा सकता है। उनकी प्रेजेंटेशन में इनोवेशन को बढ़ावा देने और छात्रों को 21वीं सदी के ज़रूरी कौशल सिखाने के प्रति उनकी मज़बूत प्रतिबद्धता दिखाई दी।
केस स्टडी और प्रेजेंटेशन का मूल्यांकन निर्णायकगणों द्वारा किया, जिसमें हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के श्री बलवीर सिंह ठाकुर, श्रीमती हर्ष गुप्ता और श्री हितेश शामिल थे। जजों ने प्रतिभागियों की कोशिशों और ज्ञानवर्धक प्रेजेंटेशन की सराहना की और साथ ही उपयोगी फीडबैक और सुझाव भी दिए। उन्होंने पढ़ाने के नए तरीकों और मज़बूत असेसमेंट प्रक्रियाओं को अपनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्र तेज़ी से बदलते तकनीकी माहौल के लिए अच्छी तरह तैयार हों।
वर्कशॉप का समापन प्रिंसिपल श्रीमती शैरन नंदा के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने सभी शिक्षकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की और कार्यक्रम को शानदार सफलता दिलाने में उनके बहुमूल्य योगदान को स्वीकार किया। यह वर्कशॉप प्रोफेशनल डेवलपमेंट की एक बेहतरीन पहल थी, जिसने क्लासरूम की गतिविधियों में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करने और सीखने वालों को भविष्य के लिए तैयार करने के प्रति शिक्षकों की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।


