पर्यावरण

ख़ास ख़बर: जलोरी जोत के 60 गाइड बनेंगे हिमालय की जैव विविधता के ब्रांड एंबेसडर

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जलोरी जोत, कुल्लू, 18 जून:

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आनी फॉरेस्ट डिवीज़न ने इको-टूरिज्म सोसाइटी, जलोरी जोत के साथ मिलकर जलोरी जोत में दो दिन का ‘नेचर गाइड और इको-टूरिज्म गाइड ट्रेनिंग प्रोग्राम’ सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस इलाके के लगभग 60 स्थानीय गाइडों ने इस ट्रेनिंग में हिस्सा लिया। इसका मकसद नेचर इंटरप्रिटेशन (प्रकृति की समझ), इको-टूरिज्म और बायोडायवर्सिटी (जैव विविधता) संरक्षण में उनकी जानकारी और स्किल्स को बेहतर बनाना था।ख़ास ख़बर: जलोरी जोत के 60 गाइड बनेंगे हिमालय की जैव विविधता के ब्रांड एंबेसडर

यह ट्रेनिंग जाने-माने नेचुरलिस्ट और बर्डिंग गाइड अंकुश ठाकुर ने दी। उन्होंने प्रतिभागियों को जलोरी पास के इलाके की समृद्ध बायोडायवर्सिटी से परिचित कराया, जिसमें वहां के पेड़-पौधे, जीव-जंतु, पक्षी, वन्यजीव और इकोसिस्टम शामिल थे। प्रतिभागियों को पक्षियों की पहचान करने के तरीके, नेचर गाइडिंग के नियम, मेहमानों को संभालने का तरीका, फील्ड स्किल्स, बायोडायवर्सिटी को समझने और eBird, Merlin Bird ID और iNaturalist जैसे आधुनिक सिटिज़न साइंस टूल्स के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई।

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जलोरी जोत में एक प्रैक्टिकल फील्ड सेशन भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को प्राकृतिक माहौल में बर्डवॉचिंग, वन्यजीवों को देखने, उनके आवास को समझने और प्रोफेशनल गाइडिंग तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव मिला।

इस मौके पर ,वन मंडलाअधिकारी आनी (DFO)डॉ चमन लाल राव ने क्षमता-निर्माण (कैपेसिटी-बिल्डिंग) की ऐसी पहलों के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ये ट्रेनिंग प्रोग्राम न केवल स्थानीय इको गाइडों के स्किल्स को मज़बूत करते हैं, बल्कि इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने, टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करने और इलाके में वन्यजीव संरक्षण में मदद करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

प्रतिभागियों ने ट्रेनिंग के लिए उत्साह दिखाया और प्रैक्टिकल लर्निंग के तरीके की सराहना की। कई गाइडों ने बताया कि ऐसे प्रोग्राम उन्हें अपनी प्राकृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझने और पर्यटकों को दिए जाने वाले अनुभव की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी ऐसे ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जा सकते हैं ताकि प्रशिक्षित स्थानीय नेचर गाइडों के नेटवर्क को और मज़बूत किया जा सके और पूरे इलाके में ज़िम्मेदार इको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा सके।

इस ट्रेनिंग का सफल समापन कुशल स्थानीय गाइड तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये गाइड संरक्षण के एंबेसडर के तौर पर काम कर सकते हैं और साथ ही हिमालयी क्षेत्र में टिकाऊ पर्यटन में योगदान दे सकते हैं।

Deepika Sharma

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