“नशे से दूर रहें, पैशन पर ध्यान दें” – गेयटी थियेटर में कला प्रदर्शनी के समापन पर बोलीं आर्टिस्ट रूपाली

“नशे से दूर रहें, पैशन पर ध्यान दें” – गेयटी थियेटर में कला प्रदर्शनी के समापन पर बोलीं आर्टिस्ट रूपाली

शिमलाः माल रोड स्थित ऐतिहासिक गेयटी कल्चरल कॉम्प्लेक्स (टैवेर्न हॉल) में “मम्माज़ ब्लेसिंग्स” के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय क्ले आर्ट और मंडाला आर्ट प्रदर्शनी ‘अक्स-ओ-नक्श’ का आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। 15 जून से शुरू हुई इस अनूठी कला प्रदर्शनी का उद्घाटन जवाहरलाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय (JLNGC of Fine Arts) की प्रधानाचार्य श्रीमती कामयनी बिष्ट द्वारा बतौर मुख्य अतिथि किया गया था।

प्रदर्शनी के आखिरी दिन आज टैवेर्न हॉल में कला प्रेमियों की भारी भीड़ उड़ी। इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान शिमला के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से आए पर्यटकों ने भी आर्टिस्ट रूपाली शर्मा की कलाकृतियों की जमकर सराहना की। प्रदर्शनी में प्रदर्शित क्ले आर्ट और आध्यात्मिक व ज्यामितीय बारीकियों से तैयार किए गए ** मंडाला आर्ट (Mandela Art)** के अद्भुत नमूनों ने हर किसी का मन मोह लिया। आगंतुकों ने रूपाली शर्मा के इस अनूठे प्रयास को कला जगत में एक बेहतरीन कदम बताया और उन्हें बेहद उत्साहजनक प्रतिक्रिया दी।

युवाओं के लिए संदेशः “नशे से दूर रहें, अपनी हॉबीज़ और पैशन पर ध्यान दें”

इस अवसर पर प्रख्यात कलाकार रूपाली शर्मा ने मीडिया और आम जनता से रूबरू होते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को रेखांकित किया। उन्होंने विशेषकर युवा पीढ़ी को एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील संदेश देते हुए कहा, “आज के समय में युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। कला, संगीत या कोई भी रचनात्मक कार्य इंसान के दिमाग को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। इसलिए जितना हो सके, युवा अपने खाली समय में अपनी हॉबीज़ (Hobbies) और अपने पैशन (Passion) को पहचानें और उस पर ध्यान केंद्रित करें।” उन्होंने कहा कि मंडाला आर्ट जैसी एकाग्रता वाली कला न केवल आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम है, बल्कि यह मानसिक तनाव को दूर कर जीवन को एक सही दिशा देने की अद्भुत क्षमता रखती है।
प्रदर्शनी में रखे गए चक्रा मंडाला और बहुरंगी क्ले डिज़ाइन्स की कलाकृतियों ने दर्शकों को पारंपरिक और आधुनिक कला के अनूठे संगम से रूबरू कराया। समापन के अवसर पर कला समीक्षकों ने भी इस प्रदर्शनी को शिमला की सांस्कृतिक विधाओं में एक नया अध्याय बताया।



