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एंटी-चिट्टा जन आंदोलन बना जन-जन का अभियान; शिमला में 8,000 से अधिक लोगों ने जागरूकता मैराथन में लिया हिस्सा

मुख्यमंत्री ने दिया नशा मुक्त हिमाचल का प्रदेशव्यापी संदेश प्रतिभागियों को दिलाई एंटी चिटा एवं स्वच्छपर्यावरण की शपथ

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 राज्यपाल ने मैराथन को दिखाई हरी झंडी, दिलाई एंटी-चिट्टा एवं स्वच्छ पर्यावरण की शपथ*

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*विश्व पर्यावरण दिवस पर ऐतिहासिक जनभागीदारी ने दिया सशक्त संदेश — “चिट्टा को ना, जीवन को हां”*

शिमला, 5 जून 2026

माननीय मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में चलाए जा रहे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक ऐतिहासिक जन आंदोलन का रूप ले लिया। शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर आयोजित एंटी-चिट्टा एवं स्वच्छ पर्यावरण जागरूकता मिनी मैराथन–2026 में 8,000 से अधिक नागरिकों की अभूतपूर्व भागीदारी ने नशे के खिलाफ हिमाचल की सामूहिक लड़ाई को नई ऊर्जा प्रदान की।

इस विशाल जन-जागरूकता अभियान का आयोजन हिमाचल प्रदेश पुलिस, पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इसका उद्देश्य नशे के विरुद्ध समाज की सामूहिक भागीदारी को मजबूत करना तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना था।

युवाओं, विद्यार्थियों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, खिलाड़ियों, शिक्षण संस्थानों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला मंडलों तथा समाज के विभिन्न वर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने नशा मुक्त एवं स्वच्छ हिमाचल के संकल्प के प्रति प्रदेशवासियों की प्रतिबद्धता को दर्शाया।

महामहिम राज्यपाल ने रिज मैदान से 10 किलोमीटर मिनी मैराथन एवं 3 किलोमीटर ड्रीम रन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा उपस्थित लोगों को एंटी-चिट्टा एवं स्वच्छ पर्यावरण की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि नशे जैसी गंभीर सामाजिक चुनौती से निपटने तथा हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता को संरक्षित रखने के लिए विशेषकर युवाओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

समापन समारोह में माननीय मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को शपथ दिलाई, विजेताओं को सम्मानित किया तथा उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिट्टे के खिलाफ लड़ाई हिमाचल प्रदेश के भविष्य और युवा पीढ़ी को सुरक्षित रखने की लड़ाई है। उन्होंने दोहराया कि प्रदेश सरकार नशा तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने के लिए कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ रोकथाम, जागरूकता, पुनर्वास और सामुदायिक भागीदारी को लगातार मजबूत कर रही है।

उन्होंने कहा कि एंटी-चिट्टा अभियान अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि युवाओं, माताओं, पंचायती राज संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी से यह एक व्यापक सामाजिक आंदोलन बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने नशा तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई और समाज को जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे नवाचारपूर्ण अभियानों के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस की सराहना की। उन्होंने कहा कि नशे के नेटवर्क के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी, लेकिन इस अभियान की स्थायी सफलता तभी संभव है जब हर नागरिक इससे जुड़ेगा।

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कार्यक्रम में लोगों का उत्साह अभूतपूर्व रहा। लगभग 5,000 अग्रिम पंजीकरणों के मुकाबले हजारों नागरिक स्वयं आगे आकर इस अभियान में शामिल हुए और कुल भागीदारी 8,000 से अधिक पहुंच गई। इससे यह एंटी-चिट्टा जन आंदोलन के अंतर्गत प्रदेश के सबसे बड़े जन-जागरूकता अभियानों में शामिल हो गया।

इस अवसर पर नशा रोकथाम, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिकता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया, जबकि विद्यार्थियों और युवाओं को प्रेरित करने के लिए नशा विरोधी एवं पर्यावरण विषयों पर प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हिमाचल प्रदेश पुलिस ऑर्केस्ट्रा “हार्मनी ऑफ द पाइन्स” की शानदार प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उत्साह, ऊर्जा और देशभक्ति का वातावरण पैदा किया।

हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक श्री अशोक तिवारी, आईपीएस ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक सफलता बनाने के लिए महामहिम राज्यपाल, माननीय मुख्यमंत्री, सभी विभागों, स्वयंसेवकों और नागरिकों का आभार व्यक्त किया।

डीजीपी ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने नशे के खिलाफ एक व्यापक रणनीति अपनाई है, जिसमें नशा तस्करों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई, इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग, जनभागीदारी, जागरूकता अभियान और पुनर्वास सहयोग शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि रिज मैदान पर उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि एंटी-चिट्टा अभियान अब नागरिकों द्वारा संचालित जन आंदोलन बन चुका है और हिमाचल प्रदेश अपनी आने वाली पीढ़ियों को नशे से बचाने के लिए एकजुट है।

कार्यक्रम का समापन इस मजबूत संदेश के साथ हुआ कि चिट्टे के खिलाफ लड़ाई केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकार और समाज का साझा मिशन है।

“नशे के खिलाफ दौड़ — हिमाचल के लिए दौड़”

एंटी-चिट्टा जन आंदोलन: सरकारी पहल से जन आंदोलन तक

विजेताओं को नकद पुरस्कार देकर किया गया सम्मानित

10 किलोमीटर मिनी मैराथन – पुरुष वर्ग

राहुल – ₹51,000

मंजीत सिंह – ₹31,000

प्रशांत चौधरी – ₹21,000

10 किलोमीटर मिनी मैराथन – महिला वर्ग

रेणु सिंह – ₹51,000

रवीना – ₹31,000

अंशिका लोधी – ₹21,000

3 किलोमीटर ड्रीम रन – ओपन पुरुष वर्ग

धर्मेंद्र – ₹21,000

सूरज कुमार – ₹11,000

ध्रुव – ₹5,100

3 किलोमीटर ड्रीम रन – ओपन महिला वर्ग

संतोष सिद्धू – ₹21,000

अनामिका – ₹11,000

पूनम – ₹5,100

वरिष्ठ नागरिक (60 वर्ष से अधिक) – पुरुष वर्ग

गोपाल सिंह – ₹21,000

नरेश बख्शी – ₹11,000

गोवर्धन शर्मा – ₹5,100

वरिष्ठ नागरिक (60 वर्ष से अधिक) – महिला वर्ग

पुष्पलता सिंघा – ₹21,000

लेखा सूद – ₹11,000

सुविधा शर्मा – ₹5,100

10–15 वर्ष आयु वर्ग – बालक वर्ग

साहिल – ₹21,000

लुकेश – ₹11,000

अगान ललित कुमार – ₹5,100

10–15 वर्ष आयु वर्ग – बालिका वर्ग

सुदीक्षा सिंह – ₹21,000

इशिका – ₹11,000

सुशीला – ₹5,100

सभी प्रतिभागियों को स्वस्थ, अनुशासित, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और नशा मुक्त जीवनशैली के संकल्प के प्रतीक के रूप में फिनिशर मेडल और टी-शर्ट प्रदान की गई।

जारीकर्ता:पुलिस महानिदेशकहिमाचल प्रदेश

Deepika Sharma

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