अर्की अस्पताल प्रकरण पहुंचा राजभवन, परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल
12 एमएम की पथरी के ऑपरेशन के लिए गई थी सीमा, वापस लौटा शव” — राज्यपाल से मिलकर परिवार ने सुनाई आपबीती

शिमला।
जिला सोलन के अर्की नागरिक अस्पताल में पथरी के ऑपरेशन के दौरान हुई सीमा शर्मा की मौत का मामला अब राजभवन पहुंच गया है। मृतका के पति हंस राज शर्मा और अन्य परिजन महामहिम राज्यपाल से मिले तथा उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में परिवार ने बताया कि 41 वर्षीय सीमा शर्मा एक साधारण ग्रामीण महिला थीं, जो रोजमर्रा के घरेलू और खेतों के कार्य करती थीं। उन्हें केवल 12 एमएम की पथरी की शिकायत थी। परिवार का कहना है कि चिकित्सकों द्वारा ऑपरेशन की सलाह दिए जाने पर उन्हें विश्वास था कि यह एक सामान्य प्रक्रिया होगी और कुछ दिनों में वह स्वस्थ होकर घर लौट आएंगी।
लेकिन परिवार के अनुसार ऑपरेशन के बाद घटनाक्रम अचानक बदल गया। उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि अस्पताल के भीतर क्या हुआ। बाद में सीमा शर्मा को 108 एम्बुलेंस के माध्यम से आईजीएमसी शिमला भेज दिया गया। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान उन्हें न तो कोई विस्तृत मेडिकल रिकॉर्ड दिया गया और न ही स्थिति की गंभीरता के बारे में स्पष्ट रूप से अवगत कराया गया।
परिवार ने राज्यपाल को बताया कि जब वे आईजीएमसी पहुंचे तो वहां उन्हें यह कहकर स्तब्ध कर दिया गया कि सीमा शर्मा की मृत्यु हो चुकी है। पति हंस राज शर्मा ने कहा कि जिस पत्नी को वह इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए थे, उसका शव उन्हें वापस मिला। उन्होंने कहा कि आज तक परिवार को यह नहीं बताया गया कि ऑपरेशन के दौरान आखिर ऐसा क्या हुआ जिससे उनकी पत्नी की जान चली गई।
परिजनों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि बाद में उनसे पोस्टमार्टम न करवाने संबंधी लिखित बयान लिया गया। परिवार का कहना है कि उस समय वे गहरे सदमे में थे और परिस्थितियों को समझने की स्थिति में नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम संस्कार के दौरान सीमा शर्मा की पीठ पर नीले निशान दिखाई दिए, जिससे उनके मन में और अधिक संदेह पैदा हुआ।
राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में परिवार ने कहा कि पूरे मामले में कई ऐसे सवाल हैं जिनके उत्तर आज तक नहीं मिले हैं। यदि ऑपरेशन किया गया था तो उससे संबंधित सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड परिवार को क्यों नहीं दिए गए? मरीज को किस स्थिति में रेफर किया गया? उपचार के दौरान क्या-क्या कदम उठाए गए? इन सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
परिवार ने राज्यपाल से आग्रह किया कि मामले की जांच स्थानीय स्तर के बजाय स्वतंत्र विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम से करवाई जाए। उन्होंने मांग की कि जांच समिति में अर्की अथवा सोलन के स्थानीय चिकित्सकों को शामिल न किया जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई प्रश्न न उठे। साथ ही ऑपरेशन, उपचार और रेफरल प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं और यदि किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
परिजनों ने राज्यपाल से कहा कि यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर आम जनता के विश्वास का प्रश्न है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी और उन्हें न्याय मिलेगा।
ज्ञापन सौंपते समय परिवार के सदस्यों की आंखें नम थीं। उनका कहना था कि यदि उन्हें अस्पताल प्रशासन से समय पर संतोषजनक जवाब और पारदर्शिता मिली होती तो शायद उन्हें न्याय की गुहार लेकर राजभवन का दरवाजा न खटखटाना पड़ता।




