सम्पादकीय

रोहरू में पक्षियों का महाकुंभ: 70 दुर्लभ प्रजातियों ने चौंकाया

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70 दुर्लभ पक्षियों ने बढ़ाई रोहरू की पहचान, वन विभाग का बड़ा सर्वे शुरू रोहरू वन प्रभाग में पहली बार व्यापक पक्षी सर्वेक्षण शुरू, 70 दुर्लभ प्रजातियां दर्ज

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रोहरू, 22 मई।

रोहरू वन प्रभाग में क्षेत्र की समृद्ध पक्षी विविधता के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और भविष्य की जैव विविधता निगरानी के उद्देश्य से शुक्रवार को प्रथम व्यापक पक्षी सर्वेक्षण औपचारिक रूप से शुरू किया गया। यह पहली बार है जब वन प्रभाग स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर व्यवस्थित पक्षी सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा है।

वन विभाग, फ्रंटलाइन स्टाफ और पक्षी विशेषज्ञों के संयुक्त सहयोग से शुरू किए गए इस सर्वेक्षण का उद्देश्य क्षेत्र की पक्षी प्रजातियों का वैज्ञानिक आकलन करना तथा भविष्य की संरक्षण योजनाओं, पर्यावास प्रबंधन और दीर्घकालिक पारिस्थितिक निगरानी के लिए आधारभूत डेटा तैयार करना है। इसके लिए रोहरू वन प्रभाग के विभिन्न वन क्षेत्रों में अलग-अलग सर्वेक्षण दल गठित किए गए हैं।

सर्वेक्षण के पहले दिन प्रकृतिवादी एवं पक्षी विशेषज्ञ अंकुश ठाकुर के नेतृत्व में एक दल ने वन विभाग के अधिकारियों और फील्ड स्टाफ के साथ बग्गी से गावस तक करीब 10 किलोमीटर की पदयात्रा कर पक्षियों का अध्ययन किया। दल में ब्लॉक अधिकारी गावस चमन लाल, उप रेंजर प्रभा देवी, वन रक्षक सुरेश कुमार, वन मित्र राहुल, पंकज और सिमरन शामिल रहे।

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सर्वेक्षण के दौरान दल ने लगभग 70 पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड तैयार किया, जो रोहरू क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाता है। ईबर्ड रिकॉर्ड के अनुसार इस दौरान कई दुर्लभ और उल्लेखनीय पक्षी प्रजातियां भी देखी गईं, जिनमें ब्राउन बुलफिंच, ब्लैक-एंड-येलो ग्रोसबीक, फायर-ब्रेस्टेड फ्लावरपेकर और लेसर कुकू प्रमुख हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन प्रजातियों की मौजूदगी स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र और क्षेत्र के उच्च जैव विविधता मूल्य का महत्वपूर्ण संकेत है।

अंकुश ठाकुर ने कहा कि सर्वेक्षण की पहली यात्रा अत्यंत सफल रही, क्योंकि पूरे मार्ग में उत्कृष्ट प्राकृतिक पर्यावास और उल्लेखनीय पक्षी विविधता देखने को मिली। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वैज्ञानिक सर्वेक्षण पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को समझने और उसका मूल्यांकन करने के लिए बेहद आवश्यक हैं। साथ ही, व्यवस्थित जैव विविधता प्रलेखन भविष्य में जिम्मेदार पर्यावरण-पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने में भी सहायक सिद्ध होगा।

रोहरू वन प्रभाग के डीसीएफ एन. रविशंकर, आईएफएस ने बताया कि इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की समृद्ध पक्षी विविधता का व्यापक वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण करना है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्ष भविष्य में जैव विविधता अध्ययन, संरक्षण योजना, पर्यावास प्रबंधन और दीर्घकालिक पारिस्थितिक निगरानी के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आधार प्रदान करेंगे।

उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में यह सर्वेक्षण रोहरू वन प्रभाग के विभिन्न वन क्षेत्रों, पर्यावासों और ऊंचाई वाले इलाकों में जारी रहेगा।

Deepika Sharma

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