असर विशेष : तो फिर कैसे पटरी पर चलेगी सामाजिक सुरक्षा पेंशन
हिमाचल वेलफेयर विभाग में वर्षों से खाली पद, पेंशन योजनाओं पर संकट, सरकार से तेज़ कदम उठाने की मांग

कर्मचारियों पर बढ़ा दबाव, पेंशन वितरण बाधित; सीएम से मिलने का प्रयास भी असफल
शिमला:
हिमाचल प्रदेश वेलफेयर डिपार्टमेंट में लंबे समय से खाली पदों के कारण जिला और ग्रामीण स्तर पर कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों की कमी के चलते सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, खासकर पेंशन वेरिफिकेशन और वितरण में भारी बाधा आ रही है।
प्रदेश सरकार हर साल नई योजनाएं तो लाती है, लेकिन वेलफेयर विभाग में स्टाफ की कमी को लेकर वर्षों से मांग उठाई जा रही है। यहां तक कि कर्मचारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी मिलने का समय मांगा, लेकिन अभी तक उन्हें कोई उचित समय नहीं मिला, जिसमें कम से कम 30 मिनट तक समस्या पर चर्चा हो सके और आगे की कार्रवाई की जा सके।
वर्तमान स्थिति इतनी गंभीर है कि एक पेंशन भी रुकने पर लाभार्थियों को कई दिनों तक विभाग के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सुबह से शाम तक कार्यालयों में भीड़ रहती है, जिससे कर्मचारियों का मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। बावजूद इसके, कर्मचारी पूरी मेहनत से काम कर रहे हैं, लेकिन एक व्यक्ति के लिए इतना काम संभालना कठिन है।
विभागीय स्तर पर सुझाव दिया गया है कि अन्य विभागों की तरह “वेलफेयर मित्र” नियुक्त किए जाएं, जिससे काम का बोझ बंट सके और योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर हो सके।
संघ का पक्ष
वेलफेयर डिपार्टमेंट कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र बिमटा ने कहा कि वर्षों से खाली पड़े पदों को भरने की मांग वे बार-बार सरकार के समक्ष रख रहे हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से भी समय लेने की कोशिश की गई, लेकिन अभी तक सही समय नहीं मिला है, जिससे समस्या का समाधान हो सके और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।
इनकी नियुक्ति की जाय
यदि वेलफेयर मित्रों की नियुक्ति की जाती है, तो यह स्टाफ की कमी को काफी हद तक दूर कर सकती है। अगर नियमित स्थायी स्टाफ की कमी है, तो इन वेलफेयर मित्रों से रोज़ाना का काम सुचारू रूप से चलाया जा सकता है, जिससे पेंशन वेरिफिकेशन और अन्य प्रक्रियाएं समय पर और प्रभावी तरीके से पूरी हो सकेंगी, और पेंशन धारकों को राहत मिलेगी।
ये भी आ रही है दिक़्क़त
हिमाचल प्रदेश में हाल ही में की गई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं की केवाईसी प्रक्रिया सही तरीके से पूरी नहीं हो पाई, संभवतः तकनीकी समस्या या कर्मचारियों की कम संख्या के चलते। इस वजह से कई पेंशन धारकों की पेंशन रुक गई है, और उन्हें अब जिला कार्यालयों तक आने-जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस दबाव के बीच, यदि अधिक स्टाफ होता तो वेरिफिकेशन समय पर और सही तरीके से हो पाता, जिससे पेंशन समय पर जारी होती और पेंशन धारकों को राहत मिलती।
बेनतीजा रही बैठक
अतिरिक्त मुख्य सचिव श्याम भगत नेगी की अध्यक्षता में तहसील कल्याण अधिकारी संघ की बैठक भी हुई थी, जिसमें स्टाफ की भारी कमी, बढ़ते कार्यभार, रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरने, विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में आ रही दिक्कतों, तहसील स्तर पर कंप्यूटर, प्रिंटर, इंटरनेट व अन्य आधुनिक सुविधाओं की कमी, दुर्गम क्षेत्रों में कार्य हेतु वाहन या परिवहन भत्ते की आवश्यकता, सीमित पदोन्नति अवसरों व कैडर स्ट्रक्चर में संशोधन जैसे मुद्दे उठाए गए, पूर्व में भी इन मांगों को लेकर ज्ञापन दिए जाने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं हो पाया, सभी विषयों पर आश्वासन दिया गया लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई विशेष कार्रवाई नहीं हुई।



