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ख़ास ख़बर: हिमाचल में बच्चों की पढ़ाई पर बड़ा सर्वे: चौथी कक्षा के छात्रों की बुनियाद की हुई जांच

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*समग्र शिक्षा के तहत 204 स्कूलों में सैंपल आधार पर की गई फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी*

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हिमाचल प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में कदम उठाते हुए चौथी कक्षा के बच्चों के बुनियादी सीखने के स्तर का वैज्ञानिक आकलन किया गया। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की ओर से 24 और 25 अप्रैल को प्रदेश में फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी (FLS-2026) आयोजित की गई। यह अध्ययन समग्र शिक्षा के अंतर्गत प्रदेश के 204 चयनित सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में सैंपल आधार पर किया गया, जिससे प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों की वास्तविक सीखने की स्थिति का आकलन संभव हो सके।
एफएलएस का मुख्य उद्देश्य कक्षा तीन के अंत तक बच्चों में विकसित हुई फाउंडेशनल लिटरेसी और न्यूमेरसी (FLN) क्षमताओं का मूल्यांकन करना रहा है। हिमाचल प्रदेश में यह आकलन उन विद्यार्थियों पर केंद्रित रहा, जिन्होंने कक्षा तीन उत्तीर्ण कर ली है और वर्तमान में कक्षा चार में अध्ययनरत हैं। प्रत्येक चयनित विद्यालय से अधिकतम 12 विद्यार्थियों को शामिल किया गया। अध्ययन के तहत बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक दक्षता का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। मौखिक भाषा और सुनकर समझने की क्षमता, ध्वनियों की पहचान, अक्षरों, शब्दों और नए शब्दों को पढ़ने की क्षमता, पढ़कर समझना, सही गति और समझ के साथ पढ़ना (ओरल रीडिंग फ्लुएंसी) तथा लिखने की क्षमता को परखा गया। वहीं गणित के आकलन में संख्या पहचान, संख्याओं में अंतर समझना, जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी क्रियाएं, शब्दों में दिए गए सवाल (वर्ड प्रॉब्लम), माप-तौल, भिन्न (फ्रैक्शन), पैटर्न और डेटा समझने जैसे विषय शामिल रहे।

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*राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तकनीक आधारित पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई*
हिमाचल प्रदेश में इस अध्ययन का समन्वय राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा किया गया। अध्ययन को पूर्णतः पारदर्शी, समयबद्ध और व्यवस्थित बनाने के लिए इसे टैबलेट आधारित प्लेटफॉर्म पर संचालित किया गया। डेटा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का सभी स्तरों पर सख्ती से पालन किया गया। एनसीईआरटी की ओर से हिमाचल प्रदेश के लिए नियुक्त प्रेक्षकों ने विभिन्न स्कूलों का निरीक्षण कर प्रक्रिया की निगरानी की। प्रेक्षक मीनाक्षी राय ने निपुण एफएलएन कॉर्डिनेटर और स्टेट असेसमेंट कोऑर्डिनेटर के साथ शिमला के लालपानी और टूटू स्थित स्कूलों का दौरा कर आकलन प्रक्रिया की समीक्षा की और यह सुनिश्चित किया कि सभी निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है।

*स्टडी के परिणाम शिक्षा से जुड़े नीतिगत निर्णयों में होंगे मददगार*
अध्ययन से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण समग्र शिक्षा के विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से किया जाएगा। इसके आधार पर शिक्षा से जुड़े नीतिगत निर्णयों को अधिक सुदृढ़ और तथ्यपरक बनाया जा सकेगा। अध्ययन के निष्कर्ष यह स्पष्ट करेंगे कि किन क्षेत्रों में विद्यार्थियों को अतिरिक्त सहयोग और मार्गदर्शन की आवश्यकता है, जिससे लक्षित शैक्षिक हस्तक्षेप की योजना बनाई जा सके। इससे न केवल संसाधनों के बेहतर उपयोग को दिशा मिलेगी, बल्कि शिक्षण पद्धतियों में भी गुणात्मक सुधार संभव होगा।

समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश के चयनित स्कूलों में सैंपल आधार पर यह फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी कराई गई है। उन्होंने कहा कि अध्ययन के परिणामों के आधार पर अगर सीखने के स्तर में कहीं कमियां सामने आती हैं, तो उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, ताकि बच्चों को मजबूत बुनियादी शिक्षा प्रदान की जा सके।

Deepika Sharma

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