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एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में उत्साह के साथ मनाया गया हिमाचल दिवस, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता रही विशेष आकर्षण

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शिमला, 13 अप्रैल:
एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में सोमवार को प्री-हिमाचल दिवस समारोह बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक विभाग और स्टूडेंट वेलफेयर विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों, विदेशी छात्रों और स्टाफ सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम के आयोजन में प्रो. डॉ. नीलम शर्मा, सहायक प्रो. डॉ. विजयश्री, सहायक प्रो. सोनाक्षी बंधु एवं सांस्कृतिक समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर डीन फैकल्टी व वरिष्ठ प्रो. डॉ. अश्वनी शर्मा, परीक्षा नियंत्रक अफजल खान बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे।तथा एडमिशन विभाग की निदेशक ऊषा चौहान भी उपस्थित थी।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, जिसके बाद विद्यार्थियों ने हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया। पहाड़ी नाटी, लोकगीत, पहाड़ी फैशन शो, भाषण प्रतियोगिता, कविताएं और समूह नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस आयोजन की विशेष आकर्षण हिमाचल थीम पर आधारित पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता रही, जिसमें छात्रों ने हिमाचल प्रदेश के मानचित्र, जिलों की विशेषताओं, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहर को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों ने अपनी कला के माध्यम से प्रदेश के इतिहास, विकास और गौरव को प्रभावशाली रूप में दर्शाया।
कार्यक्रम के सफल संचालन में छात्र समन्वयक पीयूष और जानवी ने मुख्य भूमिका निभाई। दोनों ने आयोजन की व्यवस्थाओं, प्रतिभागियों के समन्वय और कार्यक्रम के सुचारू संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम के दौरान कई विद्यार्थियों ने हिमाचल के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, विशेष रूप से Formation of Himachal Pradesh (1948) तथा स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. अश्वनी शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि हिमाचल दिवस हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और प्रदेश के विकास में योगदान देने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं को हिमाचली संस्कृति और मूल्यों को संरक्षित एवं आगे बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन न केवल सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हैं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और आपसी भाईचारे को भी सुदृढ़ करते हैं।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। पूरे विश्वविद्यालय परिसर में देशभक्ति और पहाड़ी संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

Deepika Sharma

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