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पश्चिम बंगाल व राजस्थान सरकारें ओल्ड पेंशन स्कीम लागू कर सकती हैं तो फिर हिमाचल प्रदेश सरकार क्यों नहीं?

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सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश ने एनपीएसईए के बैनर तले एनपीएस कर्मचारियों के पेंशन बहाली आंदोलन का पुरज़ोर समर्थन किया है। सीटू ने प्रदेश सरकार को चेताया है कि अगर वर्ष 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों की पेंशन बहाली वर्तमान बजट सत्र में न हुई तो प्रदेश के मजदूर भी कर्मचारियों के साथ लामबंद होंगे व प्रदेश में निर्णायक आंदोलन होगा। 

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सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि 28-29 मार्च को मजदूरों की केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व कर्मचारियों की राष्ट्रीय फेडरेशनों की दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हिमाचल प्रदेश में पेंशन बहाली एक प्रमुख मुद्दा होगा। इस हड़ताल में प्रदेश के लाखों मजदूर व कर्मचारी आंदोलन पर उतरेंगे। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि एनपीएसईए की मांगों को अविलंब माना जाए व तुरन्त पुरानी पेंशन बहाली की जाए। उन्होंने कहा है कि अगर सरकार ने वर्तमान बजट सत्र में पेंशन बहाली न की तो फिर मजदूर वर्ग कर्मचारियों के साथ मिलकर पेंशन बहाली आंदोलन को और तेज करेगा। उन्होंने कहा है कि राजस्थान सरकार द्वारा पेंशन बहाली के बाद हिमाचल प्रदेश के कर्मचारी पेंशन बहाली की उम्मीद कर रहे हैं। इसलिए प्रदेश सरकार को ओपीएस बहाल करने में देरी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश न

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में सबसे पहले एनपीएस हिमाचल प्रदेश सरकार ने 15 मई 2003 को लागू कर दी थी अतः इसकी बहाली का क्रम भी हिमाचल प्रदेश से ही शुरू होना चाहिए था।

 

उन्होंने कहा कि जब जब पश्चिम बंगाल व राजस्थान सरकारें ओल्ड पेंशन स्कीम लागू कर सकती हैं तो फिर हिमाचल प्रदेश सरकार क्यों नहीं। उन्होंने प्रदेश सरकार से अपील की है कि वह एनपीएसईए के बैनर तले चल रहे कर्मचारियों के आंदोलन की समाप्ति ओपीएस बहाली के साथ करवाए व डेढ़ लाख कर्मचारियों को सीधी राहत देकर उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करे। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की है कि प्रदेश सरकार इस विषय पर सकारात्मक पहलकदमी करेगी व वर्ष 2003 से नियुक्त कर्मचारियों के लिए ओपीएस की सुविधा लागू करेगी।

Deepika Sharma

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