ग्रुप-बी कर्मचारियों के वेतन का 3% डिफर करने के फैसले पर पुनर्विचार करे सरकार : अजय नेगी

हिमाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जी द्वारा प्रस्तुत बजट पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के राज्य अध्यक्ष अजय नेगी महासचिव इंदर ठाकुर राज्य कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी एवं जिला के सभी अध्यक्षों ने कहा कि ग्रुप-बी के कर्मचारियों एवं अधिकारियों के वेतन का 3 प्रतिशत हिस्सा डिफर करने के निर्णय पर सरकार को अविलंब पुनर्विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्रुप-बी श्रेणी वास्तव में प्रदेश के उस मध्यवर्गीय कर्मचारी वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है, जिसे प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह वर्ग न तो उच्च आय वर्ग में आता है और न ही इसे किसी विशेष वित्तीय सुरक्षा का लाभ प्राप्त होता है। अधिकांश ग्रुप-बी कर्मचारी हाउस लोन, वाहन लोन, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा खर्च और अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियों के आर्थिक दबाव में पहले से ही जूझ रहे हैं। ऐसे में वेतन का 3 प्रतिशत हिस्सा डिफर करने का निर्णय उनके मासिक बजट को सीधे प्रभावित करेगा और उनके जीवन-यापन पर प्रतिकूल असर डालेगा।
अजय नेगी ने कहा कि वर्तमान समय में महंगाई लगातार बढ़ रही है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के खर्च में हो रही वृद्धि ने पहले ही कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे में कर्मचारियों से यह अपेक्षा करना कि वे अपने वेतन का एक हिस्सा भविष्य के लिए स्थगित कर दें, न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह निर्णय कर्मचारी हितों के अनुरूप नहीं है और सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों को इस बजट से महंगाई भत्ते (DA) की किस्त जारी होने की काफी उम्मीद थी, जिससे उन्हें कुछ आर्थिक राहत मिलती। किंतु इस दिशा में कोई ठोस घोषणा न होने से कर्मचारियों में निराशा का वातावरण बना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों का अधिकार है, कोई अनुग्रह नहीं, और इसे समयबद्ध तरीके से जारी किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही अजय नेगी ने शिक्षा क्षेत्र में प्रदेश सरकार द्वारा बागवानी (Horticulture) विषय को स्कूल स्तर पर शुरू करने के निर्णय का जोरदार स्वागत किया। उन्होंने इसे एक दूरदर्शी और सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियाँ बागवानी के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। यदि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर ही इस विषय से जोड़ा जाता है, तो यह उन्हें भविष्य में स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करेगा।
उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करेगी, बल्कि प्रदेश की आर्थिकी को भी मजबूती देगी। बागवानी के क्षेत्र में नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता और विपणन में सुधार होगा तथा किसानों की आय में वृद्धि संभव होगी। इससे हिमाचल प्रदेश की पहचान एक समृद्ध बागवानी राज्य के रूप में और सुदृढ़ होगी।
अंत में अजय नेगी ने मुख्यमंत्री से पुनः आग्रह किया कि वे ग्रुप-बी कर्मचारियों की भावनाओं और उनकी वास्तविक आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वेतन का 3 प्रतिशत डिफर करने के निर्णय को वापस लें तथा कर्मचारियों को राहत देने के लिए ठोस और व्यावहारिक कदम उठाएं, ताकि प्रदेश का यह महत्वपूर्ण वर्ग स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और प्रेरित महसूस कर सके।




