Asar ALERT : हिमाचल में डायलिसिस संकट गहराया, कई किडनी मरीजों को जान का ख़तरा
योजनाएं कागज़ों में, करोड़ों का भुगतान अटका — निजी केंद्र बंद होने की कगार पर

हिमकेयर-आयुष्मान के तहत भुगतान न मिलने से निजी डायलिसिस सेंटर आर्थिक संकट में, हजारों किडनी मरीजों के इलाज पर खतरा
शिमला:
हिमाचल प्रदेश में किडनी रोगियों के इलाज को लेकर बड़ा संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री हिमाचल हेल्थ केयर योजना (हिमकेयर) और आयुष्मान भारत योजना के तहत पैनल किए गए निजी डायलिसिस केंद्रों की करोड़ों रुपये की भुगतान राशि लंबे समय से अटकी हुई है। भुगतान में देरी के कारण कई निजी डायलिसिस संस्थान गंभीर आर्थिक संकट में पहुंच गए हैं और अब उनके बंद होने की स्थिति बन रही है, जिससे हजारों किडनी मरीजों का इलाज प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है।
दरअसल हिमाचल प्रदेश सरकार का चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने 1 अप्रैल 2025 को जारी अधिसूचना में निजी अस्पतालों को डायलिसिस सेवाओं के लिए हिमकेयर योजना के तहत 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2025 तक पैनल करने का निर्णय लिया था। इसके बाद 6 अक्टूबर 2025 की अधिसूचना में इस अवधि को बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक कर दिया गया।
सरकार ने तो पैनलमेंट की अवधि बढ़ा दी, लेकिन भुगतान समय पर न होने से निजी संस्थानों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
लाखों से करोड़ों तक अटकी राशि
इसी तरह सुंदरनगर बिलासपुर कुल्लू मंडी और कांगड़ा सहित अन्य जिलों में संचालित डायलिसिस सेंटर की भी करोड़ों रुपये के आसपास की राशि लंबित बताई जा रही है। प्रदेश के अन्य निजी डायलिसिस केंद्रों की भी बड़ी रकम लंबे समय से फंसी हुई है।
हर महीने हजारों मरीजों को डायलिसिस की जरूरत
प्रदेश में किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हर साल करीब से तीस से चालीस प्रतिशत तक किडनी मरीजों की संख्या में वृद्धि दर्ज हो रही है।
किडनी फेलियर से पीड़ित मरीजों को सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में निजी डायलिसिस केंद्र ही बड़ी संख्या में मरीजों को जीवनदायी उपचार उपलब्ध करा रहे हैं।
सरकारी भुगतान में देरी से संकट
निजी डायलिसिस केंद्र संचालकों का कहना है कि सरकार ने मरीजों के इलाज के लिए योजनाएं तो शुरू कर दीं, लेकिन यदि समय पर भुगतान नहीं होता तो इन सेवाओं को जारी रखना मुश्किल हो जाता है। डायलिसिस मशीनों के रखरखाव, तकनीकी स्टाफ, दवाइयों और उपभोग्य सामग्री पर हर महीने भारी खर्च होता है।
मरीजों पर मंडराया बड़ा खतरा
यदि भुगतान की लंबित राशि जल्द जारी नहीं की गई तो कई निजी डायलिसिस केंद्रों को सेवाएं बंद करनी पड़ सकती हैं। ऐसी स्थिति में हजारों किडनी मरीजों के सामने इलाज का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा और उन्हें दूर-दराज के सरकारी अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ेगा, जहां पहले ही संसाधनों का दबाव है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
प्रदेश में बढ़ती किडनी बीमारी और डायलिसिस की बढ़ती जरूरत के बीच निजी संस्थानों की आर्थिक स्थिति खराब होना स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाओं के भुगतान में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित नहीं की गई तो इसका सीधा असर मरीजों की जिंदगी पर पड़ेगा।
डायलिसिस केंद्रों का चेतावनी भरा संदेश
निजी संस्थानों ने सरकार से लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की राशि जल्द जारी नहीं की गई तो कई केंद्रों को मजबूरन सेवाएं बंद करनी पड़ सकती हैं, जिससे प्रदेश में डायलिसिस सेवाओं का बड़ा संकट पैदा हो सकता है।



