पर्यावरण

ALERT: अनियोजित निर्माण से हिमाचल में खतरे बढ़े, वैज्ञानिक योजना ही समाधान: विशेषज्ञ

No Slide Found In Slider.

हिमाचल प्रदेश के नाजुक पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र को ध्यान में रखते हुए ‘कैरीइंग कैपेसिटी’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन शोघी स्थित साइंस म्यूजियम परिसर में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन Himachal Pradesh Council for Science, Technology & Environment (HIMCOSTE) के EIACP PC हब द्वारा School of Planning and Architecture (नई दिल्ली) के सहयोग से किया गया।

WhatsApp Image 2026-05-07 at 3.50.10 PM
WhatsApp Image 2026-05-07 at 3.50.21 PM
WhatsApp Image 2026-05-14 at 5.38.45 PM

कार्यशाला में 58 सिविल इंजीनियरिंग छात्रों को पर्वतीय क्षेत्रों में विकास की वैज्ञानिक सीमाएं समझाई गईं। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी क्षेत्र की ‘कैरीइंग कैपेसिटी’ यानी वह अधिकतम सीमा, जिसके भीतर रहकर विकास किया जा सकता है, को समझे बिना निर्माण कार्य करना भविष्य के लिए खतरा बन सकता है।

WhatsApp Image 2026-05-18 at 5.53.59 PM
WhatsApp Image 2026-05-18 at 5.53.59 PM (1)

मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश सी. अत्री ने कहा कि हिमाचल जैसे राज्यों में विकास योजनाएं भू-संरचना, जल संसाधन और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखकर ही बनाई जानी चाहिए। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे भविष्य के इंजीनियर के रूप में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दें।

विशेषज्ञों ने भूस्खलन, जल संकट, यातायात दबाव और अनियोजित पर्यटन के दुष्प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। सत्रों में ढलानों की स्थिरता, वैज्ञानिक भूमि उपयोग योजना और आपदा जोखिम प्रबंधन जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई।

नई दिल्ली से ऑनलाइन जुड़ीं प्रो. डॉ. मीनाक्षी धोटे ने इस पहल को समयानुकूल बताते हुए कहा कि युवाओं को पर्वतीय विकास की चुनौतियों के प्रति जागरूक करना बेहद आवश्यक है।

कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। यह कार्यशाला हिमाचल प्रदेश में जिम्मेदार, संतुलित और पर्यावरण-अनुकूल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।

Deepika Sharma

Related Articles

Back to top button
Close