हिमाचल भवन के रेस्टॉरेंट में ओवरचार्जिंग का मुद्दा गरम

दिल्ली स्थित हिमाचल भवन के रेस्टॉरेंट में मूल हिमाचलियों से कथित रूप से कमर्शियल दरों पर शुल्क वसूलने का मामला सामने आया है। कांगड़ा से लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर इस पर रोक लगाने की मांग की है।
सांसद ने पत्र में कहा है कि हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से चलने वाली हिमाचल पथ परिवहन निगम की वॉल्वो बसें सुबह यात्रियों को हिमाचल भवन, नई दिल्ली के बाहर उतारती हैं। यात्री प्रायः चाय और नाश्ते के लिए भवन के रेस्टॉरेंट में जाते हैं, लेकिन वहां उनसे कमर्शियल दरें वसूली जाती हैं, जो सरकारी दरों से दोगुनी तक बताई जा रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि रेस्टॉरेंट प्रबंधन का तर्क है कि सरकारी दरें केवल भवन में ठहरे मेहमानों पर लागू होती हैं, जबकि अन्य सभी ग्राहकों से व्यावसायिक दरें ली जाती हैं, चाहे वे हिमाचली हों या अन्य राज्य के निवासी। सांसद ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि अन्य राज्यों के भवनों में वहां के मूल निवासियों को रियायती दरों पर भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
डॉ. भारद्वाज ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि हिमाचल पर्यटन निगम लिमिटेड द्वारा संचालित इस रेस्टॉरेंट में मूल हिमाचलियों से सरकारी दरों पर ही शुल्क लिया जाए। इसके लिए आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र या हिमाचल सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र को मान्य प्रमाण माना जाए। उन्होंने निगम के प्रबंध निदेशक को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया है।
इस बीच ‘फ्रेंड्स ऑफ हिमाचल’ के पैट्रन इंद्र सिंह चंदेल ने भी रेस्टॉरेंट प्रबंधन पर भेदभाव के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों का व्यवहार मूल हिमाचलियों के प्रति उपेक्षापूर्ण है तथा कमर्शियल दरों पर वसूली को उन्होंने “लूट” करार दिया।
उन्होंने हरियाणा की तर्ज पर राज्य के पत्रकारों को रियायती या निःशुल्क खानपान सुविधा देने और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के आतिथ्य बजट का ऑडिट कराने की मांग भी उठाई है।
मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। यदि सरकार इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करती है तो हिमाचल भवन में शुल्क व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद थम सकता है।



