शिक्षा

सीबीएसई कैडर को लेकर बवाल, शिक्षक संगठनों ने सरकार को घेरा

हिमाचल में सीबीएसई पर सियासत गरमाई, शिक्षकों की पाँच सूत्रीय मांगें

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जॉइंट टीचर्स फेडरेशन ऑफ हिमाचल प्रदेश
सीबीएसई मुद्दे पर शिक्षक संगठनों ने मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के समक्ष पाँच सूत्रीय मांग-पत्र प्रस्तुत किया
आज जॉइंट टीचर्स फेडरेशन ऑफ हिमाचल प्रदेश के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने सीबीएसई से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर  मुख्यमंत्री  सुखविंदर सिंह सुक्खू तथा  शिक्षा मंत्री  रोहित ठाकुर से भेंट की।
यह संयुक्त प्रतिनिधिमंडल हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के अध्यक्ष  अजय नेगी की अध्यक्षता में मिला।
इस संयुक्त मोर्चे में प्रधानाचार्य संघ के अध्यक्ष श्री हरि शर्मा, मुख्य अध्यापक संघ के अध्यक्ष श्री रतन वर्मा, हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के अध्यक्ष  अजय नेगी, महासचिव  इंदर ठाकुर, चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर, एचजीटीयू के राज्य अध्यक्ष श्री नरोत्तम वर्मा एवं श्री महावीर कैंथला, सर्व टीजीटी महासंघ के राज्य अध्यक्ष श्री सुनील कुमार, उपाध्यक्ष श्री राजेश शर्मा, पीटीएफ के राज्य अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा, महासचिव श्री रजनीश कौशिक, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री राम सिंह, वित्त सचिव श्री अनिल भाटिया, सी एंड वी शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्री शेर सिंह तथा साइंस टीचर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री चंद्रकेश धीमान शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश सचिवालय कोऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष डॉ. सत्य प्रकाश शर्मा, जिला सोलन के अध्यक्ष श्री जयलाल जलपाईक तथा श्री जितेंद्र ठाकुर भी उपस्थित रहे।
मुख्य प्रेस सचिव श्री जयराम शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि संयुक्त मोर्चे ने शिक्षा मंत्री के समक्ष निम्नलिखित पाँच प्रमुख मांगें रखीं—
(1) अध्यापकों का अलग से सीबीएसई कैडर किसी भी स्थिति में न बनाया जाए, क्योंकि इससे वर्षों से चली आ रही सेवा संरचना, वरिष्ठता व्यवस्था एवं शैक्षणिक समन्वय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
(2)  शिक्षा सचिव द्वारा दिनांक 19 जनवरी को जारी अधिसूचना के कॉलम संख्या 5.6.2 का कड़ा विरोध दर्ज किया गया। इस प्रावधान में यह कहा गया है कि यदि कोई शिक्षक अपना मूल कैडर छोड़कर सीबीएसई विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करता है तो उसके पूर्व के सभी अधिकार समाप्त माने जाएंगे।
संयुक्त मोर्चे ने मांग की कि 19 जनवरी की अधिसूचना को संशोधित कर एक स्पष्ट एवं भ्रम-रहित अधिसूचना जारी की जाए, जिसमें भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा नियमों को स्पष्ट किया जाए, ताकि सीबीएसई में कार्यरत अथवा स्थानांतरित होने वाले शिक्षकों को किसी प्रकार की उलझन न रहे।
साथ ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत निर्धारित 30:1 छात्र-शिक्षक अनुपात को हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में भी समान रूप से लागू किया जाए।
(3) प्राथमिक विद्यालयों में सीएचटी (CHT) के पद किसी भी स्थिति में समाप्त न किए जाएं।
(4) सीबीएसई से संबद्ध जवाहर नवोदय विद्यालय एवं केंद्रीय विद्यालय संगठन की तर्ज पर राज्य के विद्यालयों में उप-प्रधानाचार्य के पद सृजित किए जाएं तथा उन्हें संयुक्त वरिष्ठता के आधार पर भरा जाए।
(5) हिमाचल प्रदेश में अनेक सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक (बालक एवं बालिका) विद्यालयों को मर्ज करने के बजाय उन्हें को-एजुकेशन के रूप में संचालित किया जाए तथा दोनों में से एक विद्यालय को सीबीएसई एवं दूसरे को हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड से संबद्ध किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को अपनी पसंद के बोर्ड का चयन करने का विकल्प मिल सके।
मुख्य प्रेस सचिव श्री जयराम शर्मा ने आगे बताया कि माननीय मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री ने सीबीएसई से जुड़े शिक्षकों के सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सीबीएसई व्यवस्था को शिक्षक एवं छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए ही लागू किया जाएगा तथा किसी भी स्थिति में शिक्षकों की पदोन्नति एवं वरिष्ठता को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
शिक्षक हितों को ध्यान में रखते हुए 19 जनवरी की अधिसूचना में आवश्यक संशोधन करने का भी आश्वासन दिया गया। इसके साथ ही जिन जिला मुख्यालयों एवं उप-मंडलों में बालक एवं बालिका वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, वहां उन्हें को-एजुकेशन संस्थान बनाकर एक विद्यालय को सीबीएसई तथा दूसरे को हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड से जोड़ने का भी आश्वासन दिया गया, ताकि विद्यार्थी अपनी पसंद के अनुसार शिक्षा ग्रहण कर सकें।

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Deepika Sharma

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