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दिव्यांग परीक्षार्थियों पर मनमानी गाइडलाइंस थोप रहा है आयोग

टीजीटी की परीक्षाओं के दिव्यांग उम्मीदवार परेशान

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शिमला, 8 जनवरी।

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उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने राज्य विकलांगता आयुक्त से मांग की है कि हि.प्र. राज्य चयन आयोग द्वारा दृष्टिबाधित एवं अन्य दिव्यांगजनों के साथ किए जा रहे अन्याय को तुरंत बंद कराया। उनका कहना है कि आयोग राज्य सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाकर इन वर्गों के लिए परीक्षा में लिखने की मनमानी गाइडलाइंस थोप रहा है।

राज्य विकलांगता आयुक्त सुमित खीमटा को भेजी शिकायत में प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि दृष्टिबाधित एवं उन दिव्यांगों के लिए जो हाथ से लिखने में असमर्थ हैं, राज्य सरकार ने 16 दिसंबर, 2020 को गाइडलाइंस जारी की थीं।
राज्य के सभी संस्थान दिव्यांगजनों की परीक्षा में इन्हें लागू करने के लिए बाध्य हैं। लेकिन राज्य चयन आयोग हमीरपुर ने अपनी मनमानी गाइडलाइंस बनाकर दिव्यांग विद्यार्थियों पर थोप दी हैं।

उन्होंने बताया 12 जनवरी से टीजीटी के लिए राज्य चयन आयोग परीक्षाएं आयोजित कर रहा है। राज्य सरकार की गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाकर दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी से यह प्रमाण पत्र लाने के लिए कहा गया है कि वह लिख पाने में असमर्थ हैं। इसी शर्त पर उन्हें राइटर की सहायता लेने की अनुमति दी जाएगी। जबकि राज्य सरकार की गाइडलाइंस में यह शर्त उनके लिए है जो दृष्टिबाधित नहीं है अथवा जिनके दोनों हाथों में दिव्यांगता नहीं है।

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चयन आयोग दृष्टिबाधित एवं हाथ से लिखने में असमर्थ उम्मीदवारों को राइटर उपलब्ध कराने से इनकार कर रहा है। साथ ही मनमानी शर्त जोड़ रहा है कि यदि उम्मीदवार अपना राइटर लाना चाहता है तो परीक्षा शुरू होने से 15 दिन पहले तीन राइटर का पैनल आयोग के पास भेजे। आयोग उन में से किसी एक को अनुमति देगा। जबकि राज्य सरकार की गाइडलाइंस में यह शर्त नहीं है।
प्रो. अजय श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य सरकार की गाइडलाइन में स्पष्ट कहा गया है कि यदि परीक्षा के आयोजन स्वयं राइटर उपलब्ध कराते हैं तो वह उसे परीक्षा की न्यूनतम योग्यता से अधिक शिक्षित नहीं होना चाहिए। यदि उम्मीदवार स्वयं अपना राइटर लाता है तो वह उम्मीदवार की योग्यता से एक दर्जा नीचे का होगा।
लेकिन राज्य चयन आयोग के कर्मचारी टीजीटी के उम्मीदवारों को फोन करके कह रहे हैं कि राइटर उसे ही बनाएं जो 12वीं कक्षा में पढ़ रहा हो। जबकि टीजीटी के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक और बी.एड होती है। और 12वीं कक्षा पास व्यक्ति राइटर बन सकता है।

उन्होंने कहा कि परीक्षा से ठीक पहले आयोग ने टीजीटी के दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को बुरी तरह परेशान कर दिया है। यह अवैध शर्तें पूरी करने में असमर्थ रहने पर उनके प्रवेश पत्र डाउनलोड नहीं हो रहे हैं।

उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष ने राज्य विकलांगता आयुक्त से मांग की है की टीजीटी की वर्तमान परीक्षाओं और भविष्य की सभी परीक्षाओं में राज्य सरकार की गाइडलाइंस ही मान्य हों। राज्य चयन आयोग को अपनी मनमानी गाइडलाइंस दिव्यांग विद्यार्थियों पर थोपने का कोई अधिकार नहीं है।

Deepika Sharma

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