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Asar EXCLUSIVE: “प्लास्टिक फ्री हिमाचल” सिर्फ काग़ज़ों में

नालागढ़ के बाजारों में खुलेआम प्लास्टिक—प्रशासन बेख़बर

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हिमाचल प्रदेश को प्लास्टिक फ्री राज्य घोषित किए जाने के बावजूद ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नज़र आ रही है। नालागढ़ के बाजारों में आज भी धड़ल्ले से प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है। दुकानों, सड़कों और खुले स्थानों पर बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा फैला हुआ है, जो नियमों की खुली अवहेलना को दर्शाता है।

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औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण नालागढ़ पहले ही उच्च स्तर के प्रदूषण की चपेट में है। ऐसे में प्लास्टिक का अनियंत्रित उपयोग न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि आम लोगों और पशुओं के स्वास्थ्य पर भी सीधा खतरा बन गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार आवारा पशुओं को प्लास्टिक खाते हुए देखा जा रहा है, जो उनके जीवन के लिए बेहद घातक है। इसके बावजूद संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि हिमाचल प्लास्टिक फ्री है तो नालागढ़ के बाजारों में प्लास्टिक कैसे पहुंच रहा है? क्या प्रशासन द्वारा नियमित जांच और चालान की कार्रवाई की जा रही है, या फिर नियम सिर्फ फाइलों तक ही सीमित हैं?
जनता का कहना है कि यदि जल्द ही सख़्त कदम नहीं उठाए गए, तो “प्लास्टिक फ्री हिमाचल” महज़ एक नारा बनकर रह जाएगा। अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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पशु खा रहे हैं प्लास्टिक, फिर भी कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा पशुओं को प्लास्टिक खाते हुए देखा जा रहा है, जो सीधे तौर पर उनकी जान के लिए खतरा है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
 प्रशासन क्या कर रहा है?
क्या बाजारों में नियमित निरीक्षण हो रहे हैं?
क्या नियम तोड़ने वालों पर चालान या जुर्माना लगाया जा रहा है?
क्या सिर्फ कागज़ों में ही हिमाचल प्लास्टिक फ्री है?
 जनता उठा रही सवाल
लोगों का कहना है कि यदि नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया गया तो प्लास्टिक फ्री हिमाचल सिर्फ नारा बनकर रह जाएगा।

Deepika Sharma

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