ऐप से कार शेयरिंग अपराध नहीं Motor Vehicles Act के तहत ऐप-आधारित कार शेयरिंग की पूरी सच्चाई
कारपूलिंग गैरकानूनी नहीं, कानून में स्पष्ट आधार तो फिर टैक्सी यूनियन क्यों रोक रही है गाड़ियाँ? पुलिस चालान पर बड़ा सवाल

कारपूलिंग कानून के दायरे में: ऐप से कार शेयरिंग गैरकानूनी नही
टैक्सी यूनियन, पुलिस चालान और आम नागरिक—पूरे विवाद की सरल कानूनी पड़ताल
विशेष रिपोर्ट | Asar Media House
भारत में ऐप-आधारित कारपूलिंग (Carpooling) तेजी से लोकप्रिय हो रही है। बढ़ती ईंधन कीमतें, ट्रैफिक जाम और पर्यावरणीय चिंता के बीच यह व्यवस्था आम नागरिकों के लिए एक व्यावहारिक समाधान बन चुकी है।
लेकिन हाल के दिनों में कई राज्यों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, जहाँ टैक्सी यूनियनों के दबाव में कारपूलिंग करने वाले निजी वाहन चालकों को रोका गया और पुलिस द्वारा चालान काटे गए।
सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या ऐप के ज़रिये कार शेयरिंग करना कानूनन अपराध है, या यह कार्रवाई सत्ता और दबाव की राजनीति का नतीजा है?
Carpooling क्या है? (What is Carpooling in India)
कारपूलिंग का अर्थ है—
निजी वाहन द्वारा अपनी यात्रा के दौरान अन्य यात्रियों को साथ ले जाना और ईंधन, टोल व यात्रा खर्च को साझा करना।
यह व्यवस्था:
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टैक्सी सेवा नहीं है
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व्यावसायिक परिवहन नहीं है
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मुनाफ़ा कमाने का माध्यम नहीं है
BlaBlaCar जैसे प्लेटफॉर्म इसी cost-sharing model पर काम करते हैं, जहाँ चालक को किराया नहीं बल्कि केवल यात्रा खर्च का हिस्सा मिलता है।
Motor Vehicles Act, 1988 क्या कहता है?
मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार किसी वाहन को परमिट तभी आवश्यक होता है जब वह:
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किराये (Hire) पर चलाया जाए
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व्यावसायिक लाभ (Commercial Use) के लिए उपयोग हो
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सार्वजनिक परिवहन की श्रेणी में आता हो
यदि कोई निजी वाहन:
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निजी रजिस्ट्रेशन में है
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केवल खर्च साझा कर रहा है
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तय किराया या मुनाफ़ा नहीं ले रहा
तो उसे स्वतः अवैध टैक्सी नहीं माना जा सकता।
👉 यानी हर कारपूलिंग गैरकानूनी नहीं है। मामला पूरी तरह तथ्यों और सबूतों पर निर्भर करता है।
टैक्सी यूनियनों का विरोध: अधिकार या दबंगई?
कई शहरों में टैक्सी यूनियनें यह तर्क देती हैं कि कारपूलिंग से उनका रोज़गार प्रभावित हो रहा है। इसी आधार पर वे:
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निजी कारों को सड़क पर रोकती हैं
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यात्रियों को डराती हैं
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पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बनाती हैं
लेकिन कानून स्पष्ट है—
कोई भी यूनियन कानून अपने हाथ में नहीं ले सकती।
किसी नागरिक को जबरन रोकना, धमकाना या यात्रा से रोकना आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। इसे किसी भी रूप में वैध नहीं ठहराया जा सकता।
पुलिस चालान: वैध कार्रवाई या दबाव में फैसला?
पुलिस की कार्रवाई तभी उचित मानी जाएगी जब:
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यह साबित हो कि वाहन किराये पर चल रहा था
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चालक मुनाफ़ा कमा रहा था
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वाहन के दस्तावेज़ों में कमी हो
लेकिन यदि:
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केवल ऐप इस्तेमाल करने के कारण
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यूनियन के कहने पर
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बिना ठोस सबूत के
चालान काटा जाता है, तो ऐसी कार्रवाई कानूनी रूप से चुनौती योग्य है।
आम नागरिकों के कानूनी अधिकार
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार:
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निजी वाहन से cost-sharing करना अपराध नहीं
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गलत चालान के विरुद्ध अपील का अधिकार है
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अवैध रोक-टोक पर FIR दर्ज कराई जा सकती है
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अदालतें ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर सकती हैं
Carpooling करने वालों के लिए ज़रूरी सावधानियाँ
SEO और व्यवहारिक दोनों दृष्टि से विशेषज्ञ सलाह देते हैं:
✔ केवल खर्च साझा करें, लाभ न लें
✔ ऐप बुकिंग और भुगतान का रिकॉर्ड रखें
✔ वाहन को टैक्सी की तरह चिह्नित न करें
✔ किसी भी अवैध हस्तक्षेप की लिखित शिकायत करें
नीति की कमी, विवाद की असली वजह
इस पूरे विवाद की जड़ है—
❗ केंद्र और राज्यों द्वारा स्पष्ट Carpooling Policy का अभाव
जब तक सरकार यह साफ़ नहीं करती कि:
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cost-sharing की सीमा क्या है
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कब निजी वाहन व्यावसायिक बनता है
तब तक टैक्सी यूनियन, पुलिस और आम नागरिक के बीच टकराव बना रहेगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
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हर ऐप-आधारित यात्रा टैक्सी नहीं है
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Carpooling अपने आप में गैरकानूनी नहीं
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टैक्सी यूनियन कानून से ऊपर नहीं
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पुलिस कार्रवाई सबूत आधारित होनी चाहिए
असल सवाल यह है कि कानून जनता की सुविधा के लिए है या डर और दबाव पैदा करने के लिए?


