कर्मचारियों का मार्च आधारित नियमितीकरण से भेदभाव क्यों?

संविदा नियमितीकरण नीति पर संवैधानिक सवाल, कर्मचारी महासंघ ने बताया ‘अनुच्छेद 14 व 16 का उल्लंघन’
शिमला, 5 जनवरी 2026।
हिमाचल प्रदेश में संविदा कर्मचारियों की नियमितीकरण नीति एक बार फिर विवादों में आ गई है। हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर मौजूदा वार्षिक नियमितीकरण व्यवस्था को भेदभावपूर्ण, और असंवैधानिक करार दिया है।
महासंघ ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2023 से लागू नीति के तहत नियमितीकरण केवल मार्च माह में किए जाने से समान परिस्थितियों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच गंभीर असमानता पैदा हो रही है। नियुक्ति का महीना ही कर्मचारियों के भविष्य का आधार बन गया है, जो पूरी तरह कर्मचारी के नियंत्रण से बाहर है।
पत्र में कहा गया है कि अप्रैल या उसके बाद नियुक्त संविदा कर्मचारियों को दो वर्ष की सेवा पूरी करने के बावजूद लगभग तीन साल तक नियमितीकरण का इंतजार करना पड़ता है, जबकि फरवरी-मार्च में नियुक्त कर्मचारियों को तुरंत लाभ मिल जाता है। महासंघ ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन, साथ ही प्राकृतिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है।
महासंघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि:
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वार्षिक के बजाय मासिक आधार पर नियमितीकरण व्यवस्था लागू की जाए
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जो संविदा कर्मचारी दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें बिना देरी नियमित किया जाए
कर्मचारी महासंघ का कहना है कि यदि नीति में बदलाव किया जाता है तो इससे न केवल भेदभाव खत्म होगा, बल्कि हजारों संविदा कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा और राज्य में न्यायपूर्ण प्रशासन की भावना मजबूत होगी।
अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या संविदा कर्मचारियों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी या असंतोष और गहराएगा।



