असर संपादकीय: सूर्य–चंद्र के संतुलन से सेहत: आयुर्वेद की ऋतुचर्या का शीतकालीन रहस्य
डॉ मनीष की कलम से

आयुर्वेद के अनुसार ऋतुचर्या (Seasonal Regimen – Ritu Charya)
आयुर्वेद में छह ऋतुओं की दिनचर्या को दो कालों में विभाजित किया गया है—
1. आदान काल (उत्तरायण / Northern Solstice)
इसे कम पोषण या अवशोषण का काल कहा जाता है। इस समय सूर्य की शक्ति अधिक होती है, जिससे शरीर की शक्तियों में क्रमशः ह्रास होता है।
2. विसर्ग काल (दक्षिणायन / Southern Solstice)
इसे पोषण या ऊर्जा-संचय का काल कहा जाता है। इस अवधि में सूर्य की शक्ति कम और चंद्रमा की शक्ति अधिक होती है, जिससे शरीर की शक्तियों में क्रमशः वृद्धि होती है।
आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार ऋतुओं का निर्धारण सूर्य के आधार पर होता है, इसलिए समय को दो कालों में बाँटा गया है।
A. आदान काल की ऋतियाँ (तीन ऋतियाँ)
शिशिर ऋतु – (उत्तर शीतकाल: मध्य जनवरी से मध्य मार्च)
बसंत ऋतु – (वसंत: मध्य मार्च से मध्य मई)
ग्रीष्म ऋतु – (ग्रीष्म: मध्य मई से मध्य जुलाई)
B. विसर्ग काल की ऋतियाँ (तीन ऋतियाँ)
वर्षा ऋतु – (बरसात/मानसून: मध्य जुलाई से मध्य सितंबर)
शरद ऋतु – (पतझड़: मध्य सितंबर से मध्य नवंबर)
हेमंत ऋतु – (प्रारंभिक शीतकाल: मध्य नवंबर से मध्य जनवरी)
1. हेमंत ऋतु (16 नवंबर–15 जनवरी) एवं शिशिर ऋतु (16 जनवरी–15 मार्च) की ऋतुचर्या
यद्यपि दोनों ऋतियाँ शीतकाल का प्रतिनिधित्व करती हैं, इसलिए इनकी आहार-विहार व्यवस्था लगभग समान रहती है। अंतर केवल इतना है कि हेमंत ऋतु विसर्ग काल का अंत और शिशिर ऋतु आदान काल की शुरुआत दर्शाती है।
भूमिका (Introduction)
शीत ऋतु में वातावरण ठंडा होने से त्वचा की परिधीय रक्त वाहिकाएँ संकुचित हो जाती हैं, जिससे आंतरिक अंगों में रक्त प्रवाह बढ़ता है। परिणामस्वरूप भूख और पाचन शक्ति बढ़ जाती है। इसलिए इस काल में मात्रा और गुणवत्ता—दोनों दृष्टियों से भारी आहार ग्रहण किया जा सकता है।
A. पथ्य (हितकारी आहार)
शूकधान्य (एकबीजपत्री अनाज):
नवीन चावल, जौ, गेहूँ
शिंबीधान्य (दलहन/द्विबीजपत्री):
उड़द, मूँग, चौलाई (अमरनाथ)
तरकारियाँ (सब्ज़ियाँ):
पालक, लौकी, कुंदरू, भिंडी, कद्दू, तोरी, पत्ता गोभी, टमाटर
मांसवर्ग:
मटन, चिकन, मछली, लॉब्स्टर
फलवर्ग:
अखरोट, सेब, चीकू, अंगूर, संतरा, केला, नारियल, अनानास, गन्ना, किशमिश, पपीता, नाशपाती, मूँगफली
कंदमूल (जड़ वाली सब्ज़ियाँ):
गाजर, अदरक, सुरन (जिमीकंद), चुकंदर, शकरकंद, टैपिओका/साबूदाना
दुग्धवर्ग:
दही, दूध, मलाई, चीज़, फुल क्रीम मिल्क पाउडर, मक्खन, छाछ
पानी:
गुनगुना पानी
अन्य:
मिठाइयाँ, तिल, गुड़, काजू, बादाम, पिस्ता, मदिरा/वाइन, शैम्पेन, शहद, मधुर-अम्ल-लवण रस, जॉगिंग, सूर्य नमस्कार, तेल मालिश
B. अपथ्य (अहितकारी आहार)
शूकधान्य:
पुराना चावल, बाजरा, रागी
शिंबीधान्य:
मसूर, मटर, चना
तरकारियाँ:
सौंफ, करेला, बैंगन, सहजन (ड्रमस्टिक)
मांसवर्ग:
सूखा/तला हुआ या स्मोक्ड मांस, केकड़ा
फलवर्ग:
जामुन, अमरूद
कंदमूल:
लहसुन, मूली, सिंघाड़ा, कमल के बीज (मखाना)
दुग्धवर्ग:
(उल्लेख नहीं)
पानी/शीतल पदार्थ:
आइसक्रीम, ठंडा पानी
डॉ. मुनिश सूद
एम.डी. (कायचिकित्सा), ए.एम.ओ., आयुष विभाग, जाखू
मोबाइल: 9418408949
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