संस्कृति

राजधानी में जन्माष्टमी की धूम

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अपने भक्तो को दर्शन देने के लिए ठाकुर जी स्वंय आज पालकी मेंविराज कर शोभा यात्रा की शोभा बढ़ा रहे हैं l इस शोभा यात्रा में सनातन धर्मस्कूल, आर्य समाज स्कूल , खालसा स्कूल के बच्चों द्वारा विभिन्न विभिन्नप्रस्तुतियां दी गई l स्कूली बच्चो ने ऐसा समा बंधा की इन्हें देख कर सब मन्त्रमुग्ध हो गए l राधा कृष्ण की पालकी, शिव – पार्वती की पालकी सभी काध्यान अपनी और आकर्षित कर रही थी l परचनार सभा, सूद सभा, गुरुद्वाराकमेटी द्वारा स्कूली बच्चो और आयोजको की अवगत भी की गई l

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जन्माष्टमी पर्व को लेकर राधा कृष्ण मंदिर में भव्य तैयारियां चल रहीहैं l मंदिर को विभिन्न तरह के फूलो और जगमगाती रोशनियों से सजाया गया हैं l मंदिर तो क्या सम्पूर्ण गंज बाज़ार को भी फूल मालाओं से सजायागया हैं l ऐसी भव्य शोभा देख कर ऐसा लगता हैं की मथुरा और बरसाना यहींपर हो और ठाकुर जी इसमें विचरण करते हुए नजर आ रहे हो l कल रात्रि 8 बजे से मंदिर में भजन कीर्तन का आयोजन शुरू हो जाएगा l भजन कीर्तनगायकों को वृंदावन से , दिल्ली से , जगाधरी से भजन गायक ठाकुर जी कागुणगान करते हुए नजर आएँगे l

पुजारी उमेश चाँद नौटियाल जी ने हमे बताया की हम जन्माष्टमी पर्वका 136 वार्षिकोत्सव मना रहे हैं l उन्होंने बताया की इस व्रत को रखने सेऐश्वर्य, सम्मान की प्राप्ति होती हैं , मनोवांछित फल प्राप्त होता हैं , कष्ट दूरहोते हैं , जो जन तन मन से इस व्रत को रखता हैं उसके सभी कार्य निर्विघन सम्पूर्ण होते हैंl उन्होंने बताया की “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मन्त्र काजाप जो इस दिन करता हैं उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती हैं l जन्माष्टमी व्रत का महत्व एक करोड़ एकादशी व्रतो से भी अधिक बतायागया हैं l

जन्माष्टमी पर्व पर रात्रि 2 बजे तक भजन कीर्तन का आयोजन रहता हैं, जिसमे हजारो की संख्या में श्रद्धालु

शामिल हो कर ठाकुर जी की कृपा प्राप्त करते हैं l

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          विष्णु की आठवे अवतार श्री कृष्ण अर्जुन के सारथी बनकर हमें गीताका उपदेश देते है साथ ही हम सांसारिक जीवो को ये भी समझाते है कर्म करते रहो फल की चिंता मत करो l ऐसी दिव्या आत्मा का जन्मदिवसजन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है l हिन्दू धर्म का एक प्रमुख पर्व है lजन्माष्टमी भद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता हैlऐसी दिव्या आत्मा का जन्म कंस की कैद में हुआ था l माता देवकी व वासुदेव के आठवे पुत्र थे l विष्णु का आठवे अवतार माने जाते है l इनकाजन्म आधी रात को हुआ l चारों तरफ आधी तूफान  आतंक का माहौल था l ये दिन आधर्म पर धर्म की विजय, पाप पर पुण्य की जीत, असत्य पर सत्यकी स्थापना का प्रतीक हैं l गीता का उपदेश जीवन दर्शन और कर्मयोग कामहान ग्रन्थ हैं, उनका जीवन प्रेम करुणा, चातुर्य और राजनीति की मिसाल हैंl

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      श्री हरि भगवान ने भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप में बहुत सुंदरमधुर लीलाएँ की, इन लीलाओं का इतना प्रभाव हैं की इनके श्रवण-मनन से अन्तकर्ण शुद्ध हो जाता हैं l मथुरा श्री कृष्ण की जन्मभूमि रही l वृंदावन कृष्णकी बाल लीलाओं की भूमि रही l द्वारका उनका राजधर्म स्थली रही l गोकुल बरसाना में गोपिओं संग रासलीला किया करते थे और राधा संग प्रेमलीलाभी बरसाना की ही देन हैं l

​​जन्माष्टमी पर्व पर हम गीता के उपदेशों पर चर्चा न करें ऐसा कैसेहो सकता हैं l गीता के प्रमुख उपदेश ये हैं :-

1. कर्मयोग:- कर्म करो फल की चिंता मत करो l
2. आत्मा अमर हैं l
3. धर्म के मार्ग से विमुख न होl
4. ज्ञानयोग :- सच्चा ज्ञान ही मोक्ष का मार्ग हैं l
5. भक्तियोग :- भगवान की भक्ति से मोक्ष की प्राप्ति l
6. साम्यता :- सुख दुःख , लाभ हानी में सम रहो l
7. योग:- कर्म भक्ति ज्ञान का समन्वय, कर्मयोग , ज्ञानयोग, भक्तियोग, ध्यानयोग का वर्णन किया हैं l
8. माया और संसार के बंधन l
9. सत्य की विजय, अधर्म का नाश l
10. स्वयं को जानो तुम आत्मा हो शरीर नहीं l

गीता में श्री कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध भूमि में जो उपदेश दिये वेमानव जीवन , धर्म कर्म और आत्मा के गूढ़ रहस्य को उजागर करते हैं l श्रीकृष्ण ने अर्जुन के मोह और भ्रम को दूर करके उसे कर्तव्य के मार्ग पर चलनेकी प्रेरणा दी l

जन्माष्टमी पर दही हांड़ी का प्रचलन काफी लोकप्रिय हो गया हैंl महाराष्ट्र और मुंबई की तरफ तो गोविंदा टोली बना कर ऊँची जगह परलटकी दही हांड़ी को तोड़ते हैं l इस तरह की घटनाएँ कृष्ण की माखन चोरीकी घटनाओ से शुरू हुई थी l जन्माष्टमी पर्व पर श्री कृष्ण की रासलीला, बाल लीलाओं और कंस वध के नाट्य रूपांतरण भी किये जाते हैं l

जन्माष्टमी का पर्व तो हर वर्ष मनाया जाता हैं लेकिन कितनेमंदिरों में गीता के पाठ रखे जाते हैं या उनके उपदेशों का पालन किया जाता हैं, शायद किसी भी मंदिर में नहीं ? आज जन्माष्टमी जैसे पर्व भी डीजे की धुनोंकी आगोश में कहीं खो गए हैंl

डिंपल सूद की रिपोर्ट

 

Deepika Sharma

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