संस्कृति

असर विशेष: शिमला के प्रचीनतम मंदिर के मुख्य द्वार पर बेतरतीब से रखे जूते, प्रशासन की आंखें बंद

भाषा संस्कृति विभाग को शिकायत

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शिमला संकट मोचन मंदिर के द्वार पर बेतरतीब जूते रखने से श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस

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शिमला के प्रसिद्ध संकट मोचन हनुमान मंदिर में इन दिनों एक दृश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आस्था को झकझोर रहा है। मंदिर के मुख्य द्वार पर जूतों-चप्पलों को अव्यवस्थित रूप से रखा जा रहा है, जबकि मंदिर परिसर में बाकायदा एक जूता-स्टैंड की व्यवस्था मौजूद है।

मुंबई से घूमने आए पर्यटक अभिमन्यु और रितिका ने इस पर गहरी नाराज़गी ज़ाहिर की। उन्होंने कहा, “हम शिमला घूमने आए थे और जब संकट मोचन मंदिर पहुंचे, तो हमारी नज़र सबसे पहले मंदिर के प्रवेश द्वार पर पड़ी जहाँ कई लोगों ने अपने जूते वहीं छोड़ रखे थे। जब हमने मंदिर के भीतर जाकर देखा, तो पाया कि बाहर जूते रखने के लिए बाकायदा स्टैंड लगा हुआ है। इसके बावजूद लोग मंदिर के गेट पर ही जूते उतार रहे थे, जो हमारी धार्मिक परंपराओं के खिलाफ है।

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अभिमन्यु ने कहा, “हमारे धर्म में स्पष्ट रूप से यह मर्यादा है कि मंदिर परिसर को पवित्र रखा जाए। मंदिर के द्वार पर जूते रखने का कोई स्थान नहीं है – यह पवित्रता और श्रद्धा दोनों के विपरीत है।”

रितिका ने भी कहा कि मंदिर के कर्मचारियों और प्रबंधन को इस ओर ध्यान देना चाहिए और श्रद्धालुओं को जागरूक करना चाहिए कि वे निर्धारित स्थान पर ही जूते रखें। “धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना हम सबकी ज़िम्मेदारी है, लेकिन जब लोग लापरवाही बरतते हैं, तो मंदिर प्रशासन को सख़्ती से व्यवस्था बनानी चाहिए”।

स्थानीय श्रद्धालु भी इस बात से सहमत हैं कि ऐसी लापरवाहियों से मंदिर की छवि पर असर पड़ता है और श्रद्धा की भावना को ठेस पहुँचती है।

अब देखना यह होगा कि मंदिर प्रबंधन इस ओर कितना गंभीरता से कदम उठाता है, ताकि पवित्र स्थलों की गरिमा और आस्था बनी रहे

जानकारी मिली है कि इसकी शिकायत भाषा संस्कृति विभाग को भी की गई है जिसमें ये लिखा जा रहा है कि मंदिर संबंधित प्रशासन को इस मामले में जरूरी दिशा निर्देश जारी  किए जायँ 

Deepika Sharma

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