हिमालय मंच भलकू के परिजनों को करेगा सम्मानित

आकाशवाणी और रंगकर्म के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए बी आर मेहता को जीवन उपलब्धि सम्मान। स्वास्थ्य एवं जनकल्याण मंत्री डॉ(कर्नल) धनीराम शांडिल 12 अप्रैल को करेंगे यात्रा को फ्लैगऑफ। मुख्य अतिथि के रूप में करेंगे शिरकत।
हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच भलकू स्मृति कालका शिमला रेल साहित्य यात्रा के दौरान बाबा भलकू की स्मृतियों को सहेजने के लिए आकाशवाणी के पूर्व प्रख्यात उद्घोषक, रंगकर्मी एवं बाबा भलखु स्मृति एवम् जन विकास समिति -चायल के अध्यक्ष श्री बी. आर. मेहता जी को उनके आकाशवाणी और रंगकर्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु “आजीवन उपलब्धि सम्मान” से अलंकृत किया जाएगा। साथ ही बाबा भलकू की छठी पीढ़ी के परिजनों दुर्गादत्त ठाकुर, शांतिस्वरूप ठाकुर और कांति स्वरूप ठाकुर को भलकू स्मृति सम्मान से नवाजा जाएगा। यात्रा में सहयोग के लिए बागवान श्री सुशील कुमार वर्मा को भी सम्मानित किया जाएगा। यह जानकारी हिमालय मंच के अध्यक्ष एस.आर.हरनोट ने आज मीडिया को दी।
उन्होंने बताया कि बी आर मेहता जी ने 37 वर्षों की सेवाएं शिमला, जोधपुर, बीकानेर और सूरतगढ़ आकाशवाणी में उद्घोषक और रंगकर्मी के रूप में दी है। उन्होंने न केवल नाटकों का लेखन किया बल्कि कई बड़े नाटककार लेखकों के चर्चित नाटक भी मंचित किए हैं। उनके लिखे मलाणा गांव पर विशेष रूपक तथा आकाशवाणी शिमला को 1999 के लिए लिखे नाटक “रोशनी की ओर” को अखिल भारतीय आकाशवाणी प्रसारण प्रतियोगिता में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। इसके साथ उन्होंने “बाबा भलकू स्मृति एवं जन विकास समिति” चायल का गठन भी किया और चायल बाजार में बाबा भलकू की प्रतिमा स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इन्होंने भलकू भलकू की स्मृतियों को सहेजने में मेहता जी की प्रशंसनीय भूमिका रही है।
एस आर हरनोट ने बताया कि भलकू के परिवार के वरिष्ठ सदस्य श्री दुर्गादत ठाकुर ने ब्रिटिश प्रशासन द्वारा भलकू की प्रशंसा में दिए गए सभी दस्तावेजों को अभी तक संभाल कर रखा है। इनमें एक नियुक्ति पत्र भी है जिसमें भलकू के हिंदुस्तान तिब्बत रोड में उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए उन्हें ओवरसीयर की उपाधि प्रदान की गई थी।
दो दिवसीय बाबा भलकू स्मृति कालका शिमला रेल साहित्य यात्रा के दूसरे दिन 13 अप्रैल, 2025 को 33 लेखक भलकू के पुश्तैनी गांव झाझा चायल जायेंगे जहां एक आयोजन में ये सम्मान दिए जाएंगे। पहले दिन लेखक शिमला से बड़ोग और बड़ोग से शिमला तक यात्रा करेंगे दूसरे दिन बस से चायल जायेंगे।




