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EXCLUSIVE: सरकारी स्कूलों में बच्चों को “ट्रैक सूट्स” बेचने पर सवाल

कई स्कूलों से आई शिकायतें, अधिकारियों ने कहा जाँच होगी

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हिमाचल के कई स्कूलों में बच्चों को ट्रैक सूट्स बेचे जा रहे है । अब  इस पर कई सवाल उठने लगे है । हालाकि हिमाचल सरकर की ये अच्छी पहल है कि स्कूली बच्चों को वर्दी की राशि बच्चों के खातों में डाली जा रही है यही नहीं और प्रशासन ने ये भी तय किया है कि अब स्कूल ही निर्धारित करेगा कि उसके स्कूल का बच्चा कौन सी वर्दी पहनेगा । लेकिन इस बीच कई स्कूलों से खास तौर पर ट्रेक सूट खरीदने को लेकर कुछ शिकायतें सामने आने लगी है । शिकायत में ये बात सामने आ रहा है कि अभिभावकों के लिए स्कूल में ही बच्चों को ट्रेक सूट बेचा जा रहा है। जिसमे कई जगह अपने जानपहचान वाले दुकानदार को लाभ पहुचाने के चक्कर में पीटीए में ट्रैक सूट स्कूल में ही बेचे जाने का प्रबंध किया जा रहा है 

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हालांकि परेशानी ये सामने आ रही है कि कई ट्रैक सूट की क़ीमत तो बाजार की कई दुकानों की क़ीमत से ज़्यादा देखी जा रही है ।

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“ये देखिए एक स्कूल की रेट लिस्ट “

अब सवाल उठना लाज़मी भी है क्योंकि जब अभिभावक को ही अपने जेब के आधार पर बाजार से स्वयं ट्रैक सूट नहीं खरीदावाया जा रहा है बल्कि स्कूल में ही खरीदने के लिए कहा जा रहा है जिससे कई संबंधित स्कूल प्रशासन को कटघरे में खड़े करते कई सवाल खड़े हो रहे हैं ।

सवाल ये भी है कि इस पर क्या चेकिंग की व्यवस्था है कि ट्रैक सूट की आड़ में किसी संबंधित व्यक्ति विशेष को लाभ नहीं पहुंचाया जा रहा होगा?

क्योंकि सरकारी स्कूलों में बच्चों के अभिभावकों पर वर्दी खरीदने का दबाव नहीं पड़े ईसके लिए फ्री वर्दी को लेकर सरकर छ सौ रुपये,  बच्चों के खातों में डाल रही है अब यदि ये दूसरी वर्दी खरीदने का कार्यक्रम चल पड़ा तो इस पर गोलमाल  की संभावना जताई जा रही है 

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कई स्कूल कर रहे बेहतर

हालाकि कई स्कूल इस ओर बेहतर भी कर रहे हैं कि बच्चों को ट्रैक सूट की व्यवस्था निशुल्क करवा रहे है । हालाकि स्कूल में ही ट्रैक सूट को खरीदने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता लेकिन कई सकूलों में ये ड्रेस अभिभावकों को परेशानी में डाल रही है

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आख़िर ऐसा क्यों?
प्रश्नचिह्न ये खड़े होते हैं कि ऐसी स्कूल प्रबंधन को क्या मजबूरी है कि  स्कूल में ही बच्चों को वर्दी बेची जा रही है । शिमला के ही एक स्कूल की ये भी शिकायत आई है कि किसी शिक्षक की दुकान से ट्रैक सूट्स लेकर स्कूल में बेचा जा रहा है । जिस पर अभिभावकों का कहना है कि ये ट्रैक सूट जो स्कूल में दिए जा रहे है वह बाजार से भी महंगे है ।

क्या कहते हैं अधिकारी
प्रारंभिक शिक्षा विभाग के  अतिरिक्त निदेशक बीआर शर्मा का कहना है कि स्कूली बच्चों को ट्रैक सूट्स खरीदने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता । यदि कोई स्कूल प्रबंधन अपने किसी कर्मचारी को लाभ देने के चक्कर में स्कूल में किस भी वस्तु की खरीदारी करवाता है तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी । हालाँकि कई स्कूल प्रबंधन बेहतर कर रहे हैं जिसमे बच्चों को फ्री ट्रैक सूट या अन्य सुविधाएं देने को लेकर कई एनजीओ या अन्य बेहतर रास्ते अपनाते हैं। जिसमे पीटीए भी शामिल होता है और स्कूल की और बेहतरी के लिए योजना तैयार करता है । 

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अब ना खरीदें तो क्या करे
हालाकि कुछ सरकारी स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को ये बोल रहा है की यदि आप ट्रैक सूट नहीं खरीद सकते तो रहने दीजिए इस स्थिति में अभिभावकों का कहना है की जब बच्चा स्कूल जाएगा तो साथ वाले बच्चे को दूसरी वर्दी में देख उसमे हीन भावना आ सकती है वही कई सरकारी स्कूल में तो बहुत ही निम्न वर्ग के बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं

Deepika Sharma

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