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ख़ास ख़बर: हमारा शोध कार्य समाज कल्याण और राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए होना चाहिए

सीयू में अर्थशास्त्र विभाग की ओर से 10 दिवसीय कार्यशाला आगाज

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कुलसचिव रहे मुख्य अतिथि, भाग ले रहे शोधार्थियों को किया प्रेरित

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हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की ओर से दस दिवसीय अनुसंधान कार्यशाला का आयोजन सप्त सिंधु परिसर देहरा-II में किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य समाज विज्ञान के शोधार्थियों की शोध क्षमता को बढ़ाना शोध विधियों के माध्यम से शोध में गुणवत्ता लाना है।

इस कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कुलसचिव प्रो. सुमन शर्मा रहे। इस कार्यशाला के निर्देशक प्रो. संजीत सिंह, अधिष्ठाता समाज विज्ञान स्कूल और सह- निर्देशक डॉ. शशि पूनम, विभागाध्यक्ष समाज कार्य विभाग हैं।दस दिवसीय अनुसंधान कार्यशाला में पूरे भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों की कुल 215 शोधार्थियों ने आवेदन किया है,

जिसमें से 30 शोधार्थियों का चयन हुआ है।ये 30 शोधार्थी केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय उत्तराखंड, लखनऊ विश्वविद्यालय,लखनऊ, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय नई दिल्ली, IGNOU विश्वविद्यालय नई दिल्ली से हैं। 

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इस कार्यशाला के निर्देशक प्रो.संजीत सिंह ने उद्धाटन समारोह के मुख्यातिथि प्रो.सुमन शर्मा का अभिवादन किया । दीप प्रज्जवलन से कार्यशाला का शुभारंभ हुआ । कार्यशाला के निर्देशक प्रो.संजीत सिंह ने अपने स्वागत भाषण में मुख्य अतिथि व अन्य प्राध्यापकों सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों का स्वागत किया व इस कार्यशाला का संक्षिप्त परिचय सबके समक्ष रखा।

 वहीं मुख्य अतिथि प्रो.सुमन शर्मा कहा कि हमारा शोध कार्य समाज कल्याण और राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए होना चाहिए तथा हमें अपने शोध कार्य में सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को भी सम्मलित करना चाहिए। कार्यशाला के उद्घाटन समारोह के अंत में धन्यवाद ज्ञापन कार्यशाला के सह- निर्देशक डॉ.शशि पूनम ने किया।इसके अलावा, उद्घाटन सत्र में प्रो.नारायण सिंह राव निदेशक सप्त सिंधु परिसर देहरा, डॉ. इंद्र सिंह ठाकुर, निदेशक दीनदयाल उपाध्याय अध्ययन केन्द्र और प्रो. निरुपमा सिंह, अधिष्ठाता दृश्य कला स्कूल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे ।इस 10 दिवसीय अनुसंधान कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शोध के क्षेत्र में शोधार्थियों के ज्ञान में वृद्धि व शोधार्थियों के शोध कार्य में गुणवत्ता लाना और समाज के उन क्षेत्रों पर शोध को प्रोत्साहित करना है, जिन्हें अभी तक पर्याप्त रूप से अन्वेषित नहीं किया गया है।

यह कार्यक्रम शोधार्थियों को समकालीन शोध पद्धतियों और तकनीकों से अवगत कराने के साथ-साथ उन्हें समाज में छिपे हुए मुद्दों पर शोध करने के लिए प्रेरित करेगा।

Deepika Sharma

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