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“रामदेव की पतंजलि पर कसा शिकंजा: 14 आयुर्वेदिक दवाओं के लाइसेंस रद्द, कानूनी कार्रवाई शुरू”

"उत्तराखंड सरकार ने भ्रामक विज्ञापनों और ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट के उल्लंघन पर की कार्रवाई, रामदेव और बालकृष्ण के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज"

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पतंजलि की दिव्य फार्मेसी की बैन दवाएं और कानूनी कार्रवाई

बैन की गई दवाएं: उत्तराखंड सरकार ने भ्रामक विज्ञापनों के कारण पतंजलि की दिव्य फार्मेसी की 14 उत्पादों के निर्माण लाइसेंस को निलंबित कर दिया है। ये दवाएं हैं:

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  1. दृष्टि आई ड्रॉप
  2. स्वासारी गोल्ड
  3. स्वासारी वटी
  4. ब्रोंकोम
  5. स्वासारी प्रवाही
  6. स्वासारी अवलेह
  7. मुक्ता वटी एक्स्ट्रा पावर
  8. लिपिडोम
  9. बीपी ग्रिट
  10. मधुग्रिट
  11. मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर
  12. लिवामृत एडवांस
  13. लिवोग्रिट
  14. आईग्रिट गोल्ड

कानूनी कार्रवाई: इन बैन के पीछे कानूनी मुद्दों में शामिल हैं:

  • भ्रामक विज्ञापन: इन उत्पादों को भ्रामक विज्ञापन देने के कारण उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण द्वारा निलंबित किया गया है
  • कानूनी शिकायतें: राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने रामदेव, आचार्य बालकृष्ण, दिव्य फार्मेसी, और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के खिलाफ ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के बार-बार उल्लंघन के लिए आपराधिक शिकायत दर्ज की है। इसमें COVID-19 महामारी के दौरान उनके उत्पादों की प्रभावशीलता के बारे में उच्च दावे करना​ ।
  • सुप्रीम कोर्ट में उपस्थिति: रामदेव और बालकृष्ण दोनों इन मुद्दों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित हुए, जहां उन्हें भ्रामक दावों और विज्ञापनों के लिए कई माफी जारी करनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को इस तरह के विज्ञापन बंद करने का निर्देश दिया और यदि उल्लंघन जारी रहा तो आगे की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।

ये कदम उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने और औषधीय विज्ञापन की सच्चाई को बनाए रखने के लिए उठाए गए हैं, ताकि कंपनियां अपने उत्पादों के बारे में अनपेक्षित दावे न कर सकें।​ ​

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उत्तराखंड सरकार ने पितांजलि की 14 दवाओं के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। इन दवाओं में ‘स्वासारी गोल्ड’, ‘स्वासारी वटी’, ‘ब्रोंकोम’, ‘स्वासारी प्रवाही’, ‘स्वासारी अवलेह’, ‘मुक्तावटी एक्स्ट्रा पावर’, ‘लिपिडोम’, ‘बीपी ग्रिट’, ‘मधुग्रिट’, ‘मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर’, ‘लिवामृत एडवांस’, ‘लिवोग्रिट’, ‘आईग्रिट गोल्ड’ और ‘दृष्टि आई ड्रॉप’ शामिल हैं।

इसके साथ ही, दिव्य फार्मेसी और पितांजलि आयुर्वेद लिमिटेड के खिलाफ भ्रामक विज्ञापनों के तहत आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया गया है। राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने इन भ्रामक विज्ञापनों के कारण यह सख्त कदम उठाया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी ।​ ​

 

सुप्रीम कोर्ट में रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को उनके द्वारा प्रकाशित भ्रामक विज्ञापनों के लिए माफी मांगने का आदेश दिया गया था। कोर्ट ने इनसे पूछा था कि क्यों उनकी माफी का आकार विज्ञापनों जितना बड़ा नहीं था। इसके बाद पतंजलि ने एक बड़ा माफीनामा प्रकाशित किया था ।

यह विवाद कोविड-19 वैक्सीन और अन्य आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के खिलाफ रामदेव के बयान और भ्रामक विज्ञापनों के कारण शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को निर्देश दिया है कि वह ऐसे सभी विज्ञापनों को बंद करें जो बिना प्रमाण के चिकित्सा​ उपचार  का दावा का करते हैं ।

Deepika Sharma

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