स्वास्थ्य

बड़ी खबर: स्ट्राइक पर बैठे डॉक्टर्स जोड़ रहे हाथ, बोल रहे चाहिए आवाम का साथ

आज डॉक्टर्स ने 12 बजे तक नहीं देखे मरीज़

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हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ के मुताबिक़ मुख्यमंत्री ने 13 फरवरी की वार्ता के मिनिट्सऑफ़ मीटिंग अभी तक संघ से सांझा नही किए गए हैं।लिहाज़ा आज डॉक्टर्स ने 12 बजे तक पेन डाउन स्ट्राइक की। 

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जिससे मरीज़ों को भी काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। संघ से साफ़ किया है कि मुख्यमंत्री  ने संघ की मांगों के संदर्भ में समितियों को बनाने की बात कही थी लेकिन जोसमितियां बनाई गई है वो धरातल पर कोई कार्य करती नजर नहीं रही हैंपिछले डेढ़ वर्ष से डिपार्टमेंटल प्रमोशनल कमेटी खंड चिकित्सा अधिकारियोंकी पदोनति करने में असमर्थ रही है यह कमिटी तो स्वर्ग सिधार चुकेचिकित्सकों की, नौकरी छोड़ चुके चिकित्सकों की, मेडिकल कॉलेजों मेंकार्य कर रहे चिकित्सकों की और जिन चिकित्सकों ने पदोन्नति नहीं लेने केलिए लिख कर दे दिया है उनकी भी एसीआर ढूंढ रही है माननीय मुख्यमंत्रीमोहोदय ने यह बात कही  थी की आजकल तुरंत ऑनलाइन मध्यम सेएसीआर प्राप्त की जा सकती है उसके बाद भी डीपीसी के माध्यम से आजतक चिकित्सकों की पदोन्नति नहीं हो पाई है  रोजगार का इंतजार कर रहेचिकित्सक भी विभाग की कछुआ गति का शिकार हो रहे हैं क्योंकि जब तकचिकित्सकों की पदोनाती नही होती तब तक रोजगार के लिए पद भी  रिक्तनहीं होंगे चिकित्सकों की सीनियरिटी लिस्ट बनाने के भी लिए कमेटी कागठन किया गया है लेकिन 2016 के बाद आठ साल हो गए लेकिन अब तकसेनियोरिटी लिस्ट नही बन सकी है पीजी पॉलिसी के लिए भी कमेटी कागठन किया गया है लेकिन अभी तक पीजी पॉलिसी में संशोधन नहीं हो पायाहै मुख्यमंत्री महोदय ने संघ के साथ 3 जून 2023 की वार्ता मेंऔर 13 फरवरी 2024 की वार्ता में प्रोजेक्ट डायरेक्टर एड्स कंट्रोलसोसाइटी का कार्यभार स्वास्थ्य निदेशक को एवं मेडिकल कॉलेजों केप्रधानाचार्य तथा स्वास्थ्य अधीक्षकों की शक्तियां लौटने की बात कही थीलेकिन अभी तक इस संदर्भ में भी कोई परिणाम सामने नहीं आया है

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                 प्रदेश में विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खाली चल रहे हैं औरकई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं नागरिक चिकित्सालय चिकित्सकों केअभाव में चलाए जा रहे हैं ऐसे में वर्ष भर से प्रदेश की जनता को बेहतरीनस्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहना पड़ा है और यदि इन स्थानों में अतिरिक्त पदसृजित नहीं करवाए जाते हैं तो राज्य के लोगों को बेहतरीन चिकित्सासुविधाओं से जान बूझ कर वंचित रखा जाएगा

          राज्य के मेडिकल कॉलेज में अधिकांश प्रशिक्षु चिकित्सक हिमाचलके ही स्थाई निवासी हैं ऐसे में उनके रोजगार के लिए प्रदेश के सभी स्वास्थ्यसंस्थानों में इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड के अनुसार पद सृजित करवाएजाएं हमारे ही पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में चिकित्सकों के 4500 पद स्वीकृतहैं जोकि हिमाचल से डेढ़ गुना हैं और हिमाचल में 3000 से ही कमचिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं

       हिमाचल के चिकित्सक पूरे देश भर में बेहतरीन चिकित्सा सुविधा प्रदानकरने के लिए जाने जाते हैं और हमारे हेल्थ इंडिकेटर्स भी देश भर मेंसराहनीय हैं ऐसे में हिमाचल के चिकित्सकों को भी सेंट्रल हेल्थ सर्विसिसके तुल्य डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम लागू की जाए जिनराज्यों में चिकित्सकों के एनपीए की कटौती हुई है उन राज्यों की सरकारीस्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई है अतः हिमाचल में चिकित्सकों की अग्रिम भर्तीमें एनपीए को संलग्न रखा जाए ताकि प्रदेश में मिल रही स्वास्थ सेवाओं कीगुणवत्ता से कोई समझता हो

          संघ की भी यह भी मांग है कि स्वास्थ्य निदेशक को डिप्टी मिशनडायरेक्टर के पद से हटाया जाए क्योंकि संघ की यह मान्य नहीं है किस्वास्थ्य निदेशक किसी अन्य निदेशक के अधीनस्थ कार्य करे डीपीसी होने से जो सेवाविस्तर मुख्य चिकित्सा अधिकारियों एवं अन्य चिकित्साअधिकारियों  को प्रदान किया गया है उसे भी शीघ्र समाप्त किया जाए ताकिरिक्त पदों पर युवा चिकित्सकों को रोजगार उपलब्ध हो सके साथ हीस्वास्थ्य विभाग में कार्यरत अन्य विभागों के अधिकारियों या कर्मचारियों कोहटाकर एमबीबीएस चिकित्सकों को ही कार्यक्रम अधिकारी लगाया जाएक्योंकि उन्हें ही कार्यक्रम चलाने का ज्ञान एवं अनुभव होता है

      संघ ने एक महीने से अधिक अवधि तक  काले बिल्ले लगाकर कार्यकिया लेकिन संघ को अभी तक आश्वासन ही मिला है

Deepika Sharma

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