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असर विशेष: जापान की एक सीेेरीज में डबिंग कर रही हिमाचली बेटी

असर न्यूज से सांझा किया छोटे शहर की लड़की की बड़े शहर में कैसे रहती है जद्दोजहद

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 हिमाचल की बेटी नीजू महेेश मच्छान जो की कुन्डली भाग्य सीेेरीयल में गुरप्रीत का किरदार नीभा रहीं हैं, और आजकल जापान की एक सीेेरीज में डबिंग भी कर रहीं हैं उन्होंने असर  

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न्यूज को बताया कि उन्हें किस तरह की चुनौतीयों का सामना करना पडा एक छोटे शहर से बडे शहर में काम पाने के लिए।

 

उन्होंने बताया कि जब वह मुम्बई आई तो लगभग एक साल तो मुम्बई को समझने में ही लग गया क्योंकि जिस शहर (शिमला) से वह आई थी उस शहर और इस शहर में दिन रात का अंतर है 

शिमला में लोग सूकुन और प्यार से रहते हैं,अगर शिमला में आप दो लोगों को भी जानते हो तो समझ लो कि पूरा शिमला को जानते हो,लेकिन मुम्बई ऐसा नहीं है।

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उधर किसी के लिए टाइम नहीं 

क्योंकि शिमला के युवा एक छोटे शहर से,सुकून भरे शहर से भागदौड भरे शहर में आते हैं,जहां किसी के पास किसी के लिए टाइम नहीं हैं। नीजु ने कहा कि 

खास कर मेरी जैसी लडकियों के लिए तो बहुत ही मुश्किल होती है क्योंकि वह एक ऐसे परिवार से है जो बहुत ही introvert  (अंतर मुखी )है,जहां बचपन से ही ये बता दिया जाता है की लडकियों को कितना बोलना चाहिए,कितना हंसना चाहिए,घर के सारे काम करने आने चाहिए…लेकिन मुम्बई आकर पता चला कि आपका extrovert (बाहर मुखी) होना कितना ज़रूरी है।

अभिनेत्री का कहना है कि 

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…extrovert से उनका मतलब ये कतई नही कि आप अपनी मर्यादा का ध्यान न रखें,extrovert से उनका मतलब है कि आपको आपकी बात लोगों के बीच रखनी आनी चाहिए। और मुझे बहुत खुशी होती है आजकल की शिमला शहर की लडकियों को देखकर जो अपनी बात रखना भी जानती हैं और ये भी जानती हैं कि उनकी क्या कीमत है।

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होता है दुख

लेकिन बहुत दुख होता है ये देखकर कि अभी भी कुछ घरों मे सिर्फ घर के काम मे ही सक्षम होना ही सीखाया जाता है ताकी जब वो दूसरे घर जाए तो कोई शिकायत न करे…और जब ऐसी लडकियों को अचानक से अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है तो वो सहम जाती हैं,घबरा जातीं हैं…क्योकि अवसर बताकर नहीं आता इसलिए अपनी बेटियों को शुरू से ही indipendent बनाएं…घर और बाहर दोनो समभालना सीखाएं…ताकी जब वो मुम्बई जैसे बडे शहर मे आए तो वो घबराकर नहीं हंसकर आगे बढें…क्योंकी मैंने यहां रहकर सीखा है कि शहर छोटा हो या बडा कोई फर्क नहीं पडता…आपको आपके लक्ष्य तक सिर्फ आपका हौंसला बढाता हैं…और उस हौंसले को पंख देता है आपका परिवार..

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सरकार से आग्रह

निजू सरकार से भी यही अनुरोध कर रही है कि जितना ज़्यादा हो सके उतना अलग अलग प्रतिभाओं के लिए मंच प्रदान करें जहां हमारे शहर का हर बच्चा अपनी प्रतिभा को दिखा सके…सच मानीए हमारे शहर में प्रतिभा की कमी नहीं हैं…बल्की हमारा शहर कोयले की वो खान है कि अगर ढूंढने पे आए तो बेशकीमती नगीने हमें मील जाएंगे

Deepika Sharma

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