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असर पर बेबाक आवाज़: होली मना तो रहे थे सुक्खू जी के साथ वहीं गीले शिकवे दूर कर लेते

असर पर बेबाक लेखक

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असर पर बेबाक आवाज़ 

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आदरणीय जय राम जी, होली मना तो रहे थे सुक्खू जी के साथ वहीं गीले शिकवे दूर कर लेते ये सड़कों पर उतर कर बेकार का प्रपंच किसलिए उस दिन गले मिल रहे थे आज मुर्दाबाद। और इन चिल्लाने वाले चमचों को भी समझाओ पांच साल बाद फिर इन्हें मौका मिल जाएगा राज्य को लूटने का इनकी पहुंच के हिसाब से तब तक शांति बनाए रखो।

Deepika Sharma

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