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EXCLUSIVE: अलर्ट: पीलिया की चपेट में राजधानी के बच्चे

वरयाल के मामले भी ज्यादा

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कोरोना की तीसरी लहर भले ही खत्म हो गई हो लेकिन वायरल फीवर और संक्रमण ने बच्चों के लिए मुसीबत बढ़ा दी है। वहीं शिमला में पीलिया के मरीज छोटे बच्चे ज्यादा आ रहे हैं इसका सबसे बड़ा कारण है गंदा पानी है। इसलिए बच्चे को गंदे पानी से दूर रखना चाहिए, बच्चे को फिल्टर किया हुआ पानी ही पीना चाहिए ताकि बच्चा बार-बार बीमार ना हो।

मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर अर्जुन का कहना है की हर सप्ताह की ओपीडी में दो से तीन बच्चे पीलिया के प्रभाव में आ रहे हैं। गौर हो कि इसमें यह भी देखने में आ रहा है कि जो मामले बच्चों के पीलिया में आ रहे हैं वह सरकारी सप्लाई के पानी से नहीं बल्कि यह मामले गंदे पानी के इस्तेमाल से आ रहे हैं जिसमें कुछ केस गोलगप्पे या कुछ फ्रूट चार्ट का इस्तेमाल करने वाले बच्चों को पीलिया होने की शिकायत सामने आई है। डॉक्टर ने साफ कहा  है कि बाहर के भोजन में जो गंदा पानी इस्तेमाल किया जाता है उसे खाने से बच्चे अधिकतर बीमार पड़ते हैं। लिहाजा जब भी बच्चों को बाहर का खाना खिलाए उसमें खानपान का विशेष ध्यान रखें।

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 उनका कहना है कि बच्चे से अभिभावकों को  यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा अपने मुंह में कोई भी चीज ना डालें।  रिपन हॉस्पिटल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर अर्जुन ने असर टीम से खास बातचीत के दौरान बताया कि जब बच्चे को वायरल इंफेक्शन होगा तो उसकी शुरुआत सर्दी, खांसी, पेट दर्द से होगी। इनका कहना है कि बच्चों को यह इंफेक्शन 3 से 5 दिन तक रहता है अब इससे ज्यादा दिन रहे तो बच्चे को हॉस्पिटल में चेक करवा लेना चाहिए। 

आठ घंटे नींद

डॉक्टर अर्जुन का कहना है कि बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी बच्चों की नींद होती है। कम से कम बच्चे को 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए।और जो बच्चे 5 साल से कम उम्र के हैं उन्हें दिन में भी कम से कम 2 घंटे सोना चाहिए।

क्या कहते हैं डॉक्टर

उनका कहना है कि बच्चे से अभिभावकों यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा अपने मुंह में कोई भी चीज ना डालें। जैसे अपना हाथ या कोई पेन, पेंसिल या फिर कोई भी चीज मुंह में ना डालें। इससे भी बच्चों में ज्यादातर वायरल इंफेक्शन होने का खतरा रहता है।

Deepika Sharma

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