ब्रेकिंग-न्यूज़

टीबी मौतों पर भ्रम दूर, आंकड़ों ने दिखाई तस्वीर

शिमला में टीबी से मौतों पर स्वास्थ्य विभाग ने दी सफाई, घबराने की जरूरत नहीं

No Slide Found In Slider.

पांच माह में 626 नए मामले, 28 टीबी मरीजों की मौत; पिछले साल के मुकाबले 31.7 फीसदी कमी

No Slide Found In Slider.

शिमला, 12 सितंबर। जिला शिमला में टीबी से मौतों को लेकर कुछ समाचारों में प्रकाशित खबरों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी शिमला डॉ. यशपाल रांटा ने भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि इन खबरों में स्वास्थ्य विभाग में कथित तौर पर फैली घबराहट की बात सही नहीं है। टीबी से हुई मौतों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए 11 सितंबर को उपायुक्त शिमला की अध्यक्षता में टीबी डेथ ऑडिट कमेटी की बैठक आयोजित की गई।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अप्रैल से अगस्त 2026 तक जिला शिमला में 626 नए टीबी मामले सामने आए, जिनमें 28 मरीजों की मौत हुई। यह मृत्यु दर करीब 4 फीसदी है, जो राज्य और राष्ट्रीय औसत से कम है। ऑडिट में सामने आया कि मौतें जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में हुई हैं और किसी एक क्षेत्र में मौतों का क्लस्टर नहीं पाया गया।

विभाग के मुताबिक मृत मरीजों में कैंसर, मधुमेह, हृदय और किडनी संबंधी बीमारियों समेत कई गंभीर सह-रोग भी थे। अधिकांश मरीज पहले से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और कई मामलों में टीबी मृत्यु का प्राथमिक कारण नहीं थी। विभाग ने कहा कि सह-रोगों के कारण टीबी मरीजों में मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।

No Slide Found In Slider.

डॉ. यशपाल रांटा ने बताया कि सभी मरीजों का निदान होने के बाद एंटी-टीबी उपचार तुरंत शुरू किया गया और आवश्यक जांचें करवाई गईं। मरीजों के संपर्क में आए लोगों की स्क्रीनिंग भी की गई तथा पात्र लोगों को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट दिया गया। पात्र मरीजों को निक्षय पोषण योजना और निक्षय मित्र के तहत सहायता भी मिली।

पिछले साल 41, इस साल 28 मौतें

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शिमला में टीबी से होने वाली मौतों में कमी दर्ज की गई है। पिछले साल अप्रैल से अगस्त के बीच 41 मौतें हुई थीं, जबकि इस वर्ष इसी अवधि में 28 मौतें दर्ज हुईं। यानी मौतों में 31.7 फीसदी की कमी आई है।

डॉ. रांटा ने कहा कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। टीबी रोकथाम योग्य और पूरी तरह इलाज योग्य बीमारी है, बशर्ते समय पर इसकी पहचान और उचित उपचार हो। उन्होंने मीडिया और न्यूज पोर्टलों से संवेदनशील स्वास्थ्य मामलों में खबर प्रकाशित करने से पहले स्वास्थ्य विभाग से तथ्यों की पुष्टि करने की अपील की, ताकि गलत या सनसनीखेज रिपोर्टिंग से जनता में अनावश्यक भय और भ्रम पैदा न हो।

Deepika Sharma

Related Articles

Back to top button
Close