राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत रक्छम वन बीट में शीतकालीन पौधरोपण अभियान आयोजित

*राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत रक्छम वन बीट में शीतकालीन पौधरोपण अभियान आयोजित*
महिला मंडल रक्छम की 75 से अधिक महिलाओं ने लिया भाग, एक हेक्टेयर भूमि पर रोपे गए 800 पौधे
रक्छम, किन्नौर। आज राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के अंतर्गत वन्यप्राणी परिक्षेत्र सांगला के रक्छम–छितकुल वन्यजीव अभयारण्य की रक्छम बीट में महिला मंडल
रक्छम द्वारा शीतकालीन पौधरोपण अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान में रक्छम पंचायत की 75 से अधिक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अभियान के दौरान एक हेक्टेयर भूमि पर देवदार, चुली एवं बाह्मी प्रजातियों के कुल 800 पौधे रोपित किए गए।
*कार्यक्रम में श्रीमती सुनीला नेगी जी*, प्रधान ग्राम पंचायत रक्छम, ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि श्रीमती कृष्णा नेगी जी, पंचायत समिति सदस्य, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
इस अवसर पर महिला मंडल रक्छम की प्रधान श्रीमती शंकर देवी जी, महासचिव श्रीमती मीना नेगी जी, सदस्य श्रीमती उमा नेगी जी, कोषाध्यक्ष श्रीमती कौशल्या नेगी जी, सदस्य श्रीमती फूलवंती जी तथा उपाध्यक्ष श्रीमती रेणुका जी सहित अन्य महिलाएं उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के दौरान वन्यप्राणी परिक्षेत्र सांगला के अंतर्गत रक्छम वन बीट के वन खंड अधिकारी श्री संतोष कुमार ठाकुर जी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के उद्देश्यों, वनों के संरक्षण और स्थानीय समुदाय की सहभागिता के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती सुनीला नेगी जी ने अपने संबोधन में कहा कि वनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सभी लोगों को बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए। उन्होंने वन्यजीवों की सुरक्षा में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पौधरोपण करना ही हमारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों को एक बच्चे की तरह पालना, उनकी देखभाल करना तथा उन्हें सुरक्षित रखना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने वन विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाओं से स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं और साथ ही उन्हें वनों एवं वन्यजीवों के संरक्षण में प्रत्यक्ष योगदान देने का अवसर भी मिलता है।
यह अभियान महिला सशक्तीकरण, सामुदायिक सहभागिता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल है। स्थानीय महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से न केवल वन क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने में सहायता मिलेगी, बल्कि भविष्य में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास एवं जैव विविधता के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
संदेश: “पौधे लगाएं, पौधे बचाएं—वनों को समृद्ध बनाएं और वन्यजीवों के सुरक्षित भविष्य में अपना योगदान दें।”



